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सुप्रीम कोर्ट का फैसला : मुल्ला अफरोज की नजरबंदी रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख का जुर्माना

Lagatar News : सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल पुलिस हिरासत में दिए गए कबूलनामे के आधार पर एनएसए नहीं लगाया जा सकता. अन्य परिस्थितियों पर भी विचार जरूरी है. पीठ ने सरकार के एनएसए लगाने की कार्रवाई को ग़लत बताया.
 
मुल्ला अफरोज फाइल फोटो
  • सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटा

Lagatar News : सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले ने न सिर्फ आरोपी पर लगे एनएसए को खत्म किया, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार पर एनएसए लगाने की वजह से 10 लाख का जुर्माना भी लगाया है. कोर्ट ने आज (29 सितंबर) संभल हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान मुल्ला अफरोज पर एनएसए के तहत लगी नजरबंदी की कार्रवाई को रद्द कर दिया.

 

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी पलट दिया, जिसमें मुल्ला अफरोज पर एनएसए की कार्रवाई को सही ठहराया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया. 

 

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जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान संभल में हिंसा हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी. मुल्ला अफरोज को पुलिस हिरासत में कथित कबूलनामे के आधार पर गिरफ्तार किया गया था. हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद 13 अक्टूबर 2025 को उनके खिलाफ एनएसए लगाया गया. जिसके बाद से वह मुरादाबाद जेल में बंद हैं. 

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल पुलिस हिरासत में दिए गए कबूलनामे के आधार पर एनएसए नहीं लगाया जा सकता. अन्य परिस्थितियों पर भी विचार जरूरी है. पीठ ने सरकार के एनएसए लगाने की कार्रवाई को ग़लत बताया.

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