New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को मजबूत बनाने और NEET परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित एवं “फुल-प्रूफ” बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर विस्तृत जवाब दाखिल करें. कोर्ट ने इस संबंध में 6 सप्ताह के भीतर हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने को कहा है.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि केंद्र को यह बताना होगा कि NTA में संस्थागत अनुभव (Institutional Memory) और विशेषज्ञता कैसे विकसित की जाएगी. साथ ही विशेषज्ञ कर्मियों की नियुक्ति और व्यापक विशेषज्ञ समिति के गठन पर भी जानकारी देनी होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NTA के पास ऐसी “भौतिक और बौद्धिक क्षमता” होनी चाहिए, जिससे 2024 और 2026 जैसी NEET परीक्षा विवादों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह की घटनाएं होती हैं तो यह बेहद दुखद और छात्रों के लिए मानसिक रूप से आघात पहुंचाने वाला है. हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा होती हैं तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. सुनवाई के दौरान NTA और हाई पावर्ड कमेटी के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की ओर से दाखिल जवाबों पर भी कोर्ट ने विचार किया.
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस मामले की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले को गंभीरता से ले रहे हैं. सरकार पूरी तरह चिंतित है कि किसी तरह की कमी न रहे.
यह मामला ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि NTA देश की सबसे बड़ी और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से एक NEET की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है.
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट NTA पर कड़ी टिप्पणी कर चुका है. कोर्ट ने कहा था कि यह “दुखद” है कि एजेंसी ने पहले हुए NEET पेपर लीक से कोई सबक नहीं लिया.
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