Ranchi: झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने हरमू स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल पर तीखा हमला बोला. उन्होंने भाजपा को भारतीय गबन पार्टी बताते हुए दावा किया कि 2014 के बाद देश में 24 तरह के गबन हुए हैं.
प्रेस वार्ता की शुरुआत में सुप्रियो भट्टाचार्य अपने साथ एक खीरा लेकर पहुंचे. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के बागान का 90,600 का खीरा है और इसका स्वाद पत्रकार भी चखेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने कृषि लोन और सब्सिडी का लाभ लिया, जबकि दूसरी तरफ महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में प्याज, कपास और गन्ना उगाने वाले हजारों किसान कर्ज के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हैं. इसे उन्होंने किसान गबन बताया.
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि गबन की शुरुआत 2016 की नोटबंदी से हुई, जिसे उन्होंने करेंसी गबन कहा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपकर पीएसयू गबन किया गया. बैंकों का विलय कर बड़े उद्योगपतियों के 18 लाख करोड़ रुपये के राइट-ऑफ लोन को छिपाने की कोशिश की गई, जिसे उन्होंने बैंक गबन बताया.
उन्होंने आरोप लगाया कि हसदेव के जंगलों से लेकर देश के बंदरगाह, एयरपोर्ट और पहाड़ तक निजी कंपनियों को सौंप दिए गए. उन्होंने इसे जंगल गबन, समुद्र गबन, आकाश गबन और पहाड़ गबन बताया. वनतारा प्रोजेक्ट के नाम पर सरकारी पशुओं को निजी कॉरपोरेट को देने का आरोप लगाते हुए इसे पशु गबन भी कहा.
सुप्रियो भट्टाचार्य ने पुलवामा और कारगिल के ताबूत घोटाले का जिक्र करते हुए शहीद गबन का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकारें विधायकों और सांसदों को तोड़कर चला रही हैं, इसलिए इसे सांसद और विधायक गबन कहा जाना चाहिए. उन्होंने असम के परिसीमन, पश्चिम बंगाल के 30 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप और ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग, यूपीएससी, यूजीसी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और नीति आयोग जैसी संस्थाओं के दुरुपयोग को संस्थागत गबन बताया.
रोजगार और शिक्षा पर भी उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा पूरा नहीं हुआ. नीट परीक्षा दो बार लीक होने और वायु सेना की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने का जिक्र करते हुए इसे शिक्षा गबन बताया. श्रम कानूनों और पीएफ-ईएसआई के नियमों में बदलाव को उन्होंने मजदूर गबन कहा.
विदेश नीति पर हमला करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है. उन्होंने विदेश मंत्री के एक बयान का जिक्र करते हुए इसे विदेश नीति गबन बताया. साथ ही प्रधानमंत्री के चुनावी भाषणों में कपड़ों से पहचान, मंगलसूत्र, भैंस और नल की टोटी जैसे बयानों को सांप्रदायिक गबन कहा. उन्होंने मणिपुर हिंसा का भी जिक्र करते हुए कहा कि सात साल से जल रहे राज्य की अनदेखी की गई.
राम मंदिर भूमि खरीद मामले को लेकर भी सुप्रियो भट्टाचार्य ने सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में 4 करोड़ रुपये की जमीन आधे घंटे में 48 करोड़ रुपये में खरीदी गई, लेकिन इस मामले में चंपत राय और गवाह अनिल मिश्रा पर कोई एफआईआर नहीं हुई. उन्होंने पूछा कि इतनी बड़ी कथित मनी लॉन्ड्रिंग के बावजूद ईडी ने कार्रवाई क्यों नहीं की. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े मामलों में आस्था के साथ धोखा हुआ है.
प्रेस वार्ता के अंत में सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय रुपये का गिरना, देश का गिरना है. उन्होंने दावा किया कि यह बात मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल पर पूरी तरह लागू होती है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


Leave a Comment