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JPSC-JSSC परीक्षा फर्जीवाड़ा: रांची के महंगे होटल में ठहरते थे TDPL निदेशक, बिल चुकाता था अभय तिवारी

Ranchi News: TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को JPSC से जोड़ने की प्रक्रिया में अभय तिवारी की भूमिका की पड़ताल की जा रही है. आरोप है कि कंपनी को टेंडर प्रक्रिया के बजाय नॉमिनेशन के आधार पर काम दिलाने में उसने बिचौलिए की भूमिका निभाई.
 
अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की सांकेतिक तस्वीर.
  • CID जांच में मिले कई वित्तीय व दस्तावेजी सबूत
  • 24 अभ्यर्थियों की सेटिंग का दावा
  • होटल का भुगतान भी जांच के दायरे में
  • लालपुर के फ्लैट से मिला TDPL का आई कार्ड

Ranchi News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की जांच कर रही सीआईडी के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं. जांच में अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी की भूमिका को लेकर गंभीर तथ्य सामने आने का दावा किया गया है. एजेंसी की जांच में उसे परीक्षा से जुड़े कथित नेटवर्क में अहम कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है.

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जांच के मुताबिक, TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को JPSC से जोड़ने की प्रक्रिया में अभय तिवारी की भूमिका की पड़ताल की जा रही है. आरोप है कि कंपनी को टेंडर प्रक्रिया के बजाय नॉमिनेशन के आधार पर काम दिलाने में उसने बिचौलिए की भूमिका निभाई. हालांकि, इस पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.

 

मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल बुधेश्वर भगत के कथित कबूलनामे को भी CID जांच में अहम माना जा रहा है. उसके अनुसार, 14वीं JPSC परीक्षा में उसने 24 अभ्यर्थियों की कथित सेटिंग कराई थी और इन अभ्यर्थियों के नाम अभय तिवारी को उपलब्ध कराए गए थे. इनमें से 11 अभ्यर्थियों द्वारा कथित तौर पर 10-10 लाख रुपये दिए जाने और PT परीक्षा पास करने की बात सामने आई है.

 

CID की जांच में TDPL के निदेशकों के रांची प्रवास से जुड़ा वित्तीय लेनदेन भी सामने आया है. जांच एजेंसी के अनुसार, निदेशकों के रांची प्रवास के दौरान रेडिसन ब्लू होटल का खर्च अभय तिवारी के निजी बैंक खाते से UPI के जरिए भुगतान किया गया था. CID इस भुगतान को कंपनी से जुड़े उसके कथित वित्तीय संबंधों के एंगल से भी जांच रही है.

 

जांच में अभय तिवारी के रिश्तेदार सौरभ कुमार पांडेय के नाम पर लालपुर में किराए पर लिए गए एक अपार्टमेंट का भी जिक्र सामने आया है. CID की छापेमारी के दौरान इसी ठिकाने से अभय तिवारी के नाम का TDPL कंपनी का आई कार्ड बरामद होने की बात कही गई है.

 

CID अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित धांधली का नेटवर्क किस स्तर तक फैला था, किन लोगों की इसमें भूमिका थी और अभ्यर्थियों से कथित तौर पर वसूली गई रकम का लेनदेन किस तरह किया गया. मामले में आगे और गिरफ्तारियां तथा नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.

 

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