Ranchi : अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने 20 सितंबर को हिंदी टिप्पण की परीक्षा के विरोध में धरना देने का ऐलान किया था. उनकी मांग है कि यह परीक्षा बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए. लेकिन अब खबर है कि कुछ कारणों से कल होने वाला यह धरना स्थगित कर दिया गया है. संघ के जिला अध्यक्ष सलीम सहाय तिग्गा ने इसके लिए एक पत्र भी जारी किया है.

लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है
जब इस पत्र को पढ़ा गया तो उसमें जगह-जगह भारी-भरकम गलतियां मिलीं. एक प्राथमिक शिक्षक संगठन का जिला अध्यक्ष, जो खुद बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा संभालता है, अगर इतनी सारी स्पेलिंग और व्याकरण की गलतियां करेगा तो बच्चों से हम क्या उम्मीद करेंगे?
यही कारण है कि अब कई लोग सवाल उठा रहे हैं
- क्या ऐसे शिक्षक वाकई अपने पद पर बने रहने लायक हैं?
- अगर हैं तो आखिर क्यों इन्हें हिंदी टिप्पण की परीक्षा से इतनी दिक्कत है?
- क्या परीक्षा से डर उनकी कमजोरी को उजागर नहीं कर देता?
सोचने वाली बात यह है कि जो शिक्षक खुद सही से लिखना-पढ़ना नहीं जानते, वे बच्चों को क्या सिखाएंगे? अब गेंद सरकार और विभाग के पाले में है-
- क्या सरकार ऐसे शिक्षकों की परीक्षा लेगी?
- या फिर दबाव में आकर इसे टाल देगी?
शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधे सवाल उठाते इस प्रकरण ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था की पोल खोली है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि सुधार की सबसे बड़ी जरूरत कहां है.
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