Ranchi News: अपराधियों के तौर-तरीके बदल रहे हैं तो झारखंड पुलिस भी अपनी कार्यशैली को आधुनिक बनाने में जुटी है. आने वाले दिनों में झारखंड पुलिस के जवान कई आधुनिक उपकरणों से लैस नजर आएंगे. पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा, निगरानी और अपराध की जांच से जुड़े कई उपकरणों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है. ताजा दस्तावेज से पता चलता है कि फुल बॉडी प्रोटेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक लेक्टर्न पोडियम और रियल टाइम व्यूइंग सिस्टम जैसे उपकरणों की खरीद और तकनीकी जांच की जा रही है.
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार, इन उपकरणों के नमूनों का निरीक्षण और फील्ड ट्रायल कराया जा रहा है. इसके लिए झारखंड जगुआर, विशेष सूचना ब्यूरो और सुरक्षा शाखा के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है. फुल बॉडी प्रोटेक्टर के 500 उपकरणों की खरीद का उल्लेख है. वहीं इलेक्ट्रॉनिक लेक्टर्न पोडियम के पांच उपकरण प्रस्तावित हैं. रियल टाइम व्यूइंग सिस्टम के लिए तकनीकी रूप से सफल कंपनियों के नमूनों का परीक्षण किया जाना है.
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घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में भी बढ़ेगा तकनीक का इस्तेमाल
झारखंड पुलिस का फोकस केवल जवानों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है. अपराध की जांच को वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाने के लिए भी कई उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है. पुलिस की आधिकारिक निविदाओं में साक्ष्य पैकिंग और संग्रह किट, क्राइम सीन जांच किट और फिंगरप्रिंट किट जैसी सामग्री की खरीद से जुड़े टेंडर भी दर्ज हैं.
इन उपकरणों की मदद से घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से जुटाने, पैक करने और जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया को और व्यवस्थित किया जा सकता है. इसके साथ ही कंप्यूटर और अन्य तकनीकी संसाधनों की खरीद पर भी जोर दिया जा रहा है.
जंगल से शहर तक तकनीक का सहारा
नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान के दौरान झारखंड पुलिस पहले से ही आधुनिक संचार और निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल करती रही है. झारखंड जगुआर के जवानों के लिए आधुनिक दूरबीन, रात्रि दृष्टि उपकरण, उपग्रह फोन, जीपीएस और वायरलेस संचार जैसे संसाधन महत्वपूर्ण हैं.
अब पुलिस की कोशिश इन तकनीकी संसाधनों का दायरा और बढ़ाने की है. खासकर ऐसे इलाकों में जहां जवानों को अभियान के दौरान ज्यादा जोखिम उठाना पड़ता है, वहां सुरक्षा उपकरणों की भूमिका अहम हो जाती है.
सोशल मीडिया और साइबर अपराध पर भी नजर
आज अपराध का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया से जुड़ चुका है. सोशल मीडिया के जरिए धमकी, फर्जी पहचान, ठगी, आपत्तिजनक सामग्री और दूसरे साइबर अपराध पुलिस के लिए नई चुनौती बन चुके हैं. ऐसे में पुलिस की साइबर जांच क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी हो गया है.
झारखंड पुलिस में साइबर अपराध से निपटने के लिए अलग व्यवस्था है. डिजिटल साक्ष्य जुटाने से लेकर ऑनलाइन गतिविधियों की जांच तक पुलिस की भूमिका लगातार बढ़ रही है. ऐसे में आने वाले समय में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिलने वाली सूचनाएं भी पुलिस की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं.
हालांकि उपलब्ध पुलिस दस्तावेजों में किसी विशेष कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सोशल मीडिया निगरानी प्रणाली की खरीद का स्पष्ट उल्लेख नहीं है. इसलिए इसे फिलहाल पुलिस की घोषित खरीद प्रक्रिया का हिस्सा बताना उचित नहीं होगा.
रियल टाइम निगरानी से ऑपरेशन पर नजर
पुलिस मुख्यालय की नई खरीद प्रक्रिया में रियल टाइम व्यूइंग सिस्टम भी खास है. इस तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल लाइव वीडियो या निगरानी से जुड़े दृश्य देखने में किया जा सकता है. हालांकि पुलिस के पत्र में इस उपकरण के अंतिम उपयोग का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है.
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