Dhanbad: शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के दौरान एक 12 साल के लड़के की जान चली गयी. तेलमच्चो का रहने वाला कन्हाई तुरी बीते चार दिनों से अस्पताल में भर्ती था. हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसमें जापानी इंसेफेलाइटिस जैसे लक्षण देखे और जांच के लिए सैंपल माइक्रोबायोलॉजी विभाग भेज दिया.
शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. इसके कुछ ही देर बाद उसकी रिपोर्ट आयी, जिसमें जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई. यानी जब तक बीमारी की आधिकारिक पुष्टि हुई, तब तक बच्चे की जान जा चुकी थी. सूत्रों के मुताबिक, इस साल जिले में इस बीमारी से यह पहली मौत मानी जा रही है.
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बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है यह बीमारी
जापानी इंसेफेलाइटिस मच्छरों के काटने से फैलता है और सीधे दिमाग पर असर डालता है. भारत में यह बीमारी ज्यादातर क्यूलेक्स मच्छर से फैलती है. इसका असर किसी भी उम्र के व्यक्ति पर हो सकता है, लेकिन बच्चे इसकी चपेट में जल्दी आते हैं.
शुरुआत में बुखार और सिर दर्द जैसे सामान्य लक्षण दिखते हैं. लेकिन बीमारी बढ़ने पर मरीज को भ्रम, अजीब व्यवहार, दौरे और बेहोशी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. बच्चों में यह स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही सतर्क होना जरूरी है.
इलाज नहीं, बचाव ही उपाय
इस बीमारी की कोई खास दवा अभी मौजूद नहीं है. गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करके उनके लक्षणों के हिसाब से इलाज किया जाता है. ऐसे में टीकाकरण को सबसे कारगर बचाव माना जाता है. इसके अलावा घर के आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरदानी का इस्तेमाल करना और पूरी बांह के कपड़े पहनना भी संक्रमण से बचाने में मदद करता है.
बरसात के मौसम में इस बीमारी का खतरा और बढ़ जाता है. अगर किसी बच्चे को तेज बुखार के साथ सुस्ती, बेहोशी या दौरे जैसी शिकायत हो, तो बिना देर किये डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.
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