Ranchi : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में 1 करोड़ रुपये से अधिक की उन निविदाओं की उच्च स्तरीय जांच होगी, जो एसएफसी की स्वीकृति के बिना जारी की गई हैं. यह निर्णय झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई स्थायी वित्त एवं लेखा समिति की 14वीं बैठक में लिया गया.
मंगलवार को आयोजित इस बैठक में रिम्स के निदेशक सह सदस्य सचिव डॉ. राजकुमार, अपर निदेशक प्रशासन कृष्ण प्रसाद बाघमारे, संयुक्त सचिव छवि रंजन, एसटी-एससी सदस्य जगन्नाथ प्रसाद, डॉ. अशोक प्रसाद सहित विभागीय अधिकारी और रिम्स के प्रतिनिधि मौजूद रहे.
बैठक में कुल 15 एजेंडों पर चर्चा की गई, जिसमें वित्तीय पारदर्शिता, अधोसंरचना विकास, चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधार प्रमुख रहे.
समिति ने निर्णय लिया कि जिन योजनाओं में 1 करोड़ रुपये से अधिक की लागत है और जिन पर एसएफसी की स्वीकृति अनिवार्य है, उन पर बिना स्वीकृति जारी निविदाओं की जांच के लिए विशेष कमेटी बनाई जाएगी. यह कमेटी पूरे मामले की समीक्षा कर रिपोर्ट देगी.
बैठक में चिकित्सा उपकरणों की खरीद पर जब लागत का विवरण मांगा गया तो रिम्स प्रबंधन इसे उपलब्ध नहीं करा सका. इस पर अपर मुख्य सचिव ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना कास्ट डिटेल के किसी भी खरीद प्रक्रिया की शुरुआत नियमों के खिलाफ है.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब समिति को पूरी जानकारी नहीं दी गई तो किस आधार पर 1 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं के टेंडर जारी किए गए. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि आगे से समिति की स्वीकृति के बाद ही टेंडर जारी होंगे और इस पूरे मामले को अगली गवर्निंग बॉडी की बैठक में रखा जाएगा.
बैठक में रिम्स के विकास को लेकर कई अहम फैसले भी लिए गए. सभी नए हॉस्टलों को 12 मंजिला बनाने का निर्णय लिया गया ताकि अधिक छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों को सुविधा मिल सके. अंडर ग्रेजुएट हॉस्टल के नवीनीकरण और पीजी हॉस्टल को पीपीपी मोड पर संचालित करने की संभावनाओं पर विचार करने का निर्देश दिया गया.
समिति ने रिम्स को अगले तीन महीने में पूरी तरह कैशलेस और पेपरलेस बनाने का लक्ष्य दिया. इसके लिए प्रभावी आईटी सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए गए ताकि मरीजों को पारदर्शी और बेहतर सेवा मिल सके.
चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकीकरण के तहत रोबोटिक सर्जरी को पीपीपी मोड पर शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने को कहा गया. साथ ही जेनेटिक बीमारियों के इलाज को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत संसाधन उपलब्ध कराने के लिए समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया.
इसके अलावा सभी नई इमारतों के लिए संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया. कर्मचारियों, डॉक्टरों और शिक्षकों की मांगों से जुड़े प्रस्ताव विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया, जिन पर विभाग स्तर पर निर्णय लिया जाएगा.
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए रिम्स में रिटायर्ड एसपी या लेफ्टिनेंट कर्नल स्तर के सिक्योरिटी ऑफिसर और रिटायर्ड इंस्पेक्टर या जेसीओ स्तर के असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर की नियुक्ति का भी निर्णय लिया गया.
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