Ranchi: चतरा के टंडवा स्थित मगध व आम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में आरोपी टीपीसी के रीजनल कमांडर और जोनल कमांडर के पद पर रहे कोहराम उर्फ लक्ष्मण गंझू को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली. हाईकोर्ट ने कोहराम की जमानत याचिका खारिज कर दी.
एनआइए की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा.
बता दें कि टेरर फंडिंग से जुड़े केस में रांची की एनआइए की विशेष अदालत में ट्रायल चल रहा है. एनआइए ने टंडवा थाना में दर्ज कांड संख्या 2/2016 को फरवरी 2018 को टेकओवर कर NIA 3/2018 दर्ज किया था. अनुसंधान के बाद एनआइए ने मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था.
टीपीसी को फंड देने की हुई है पुष्टि
एनआइए ने जांच के दौरान यह पाया है कि सीसीएल, पुलिस, उग्रवादी व शांति समिति के बीच समन्वय से टेरर फंडिंग हो रही थी. तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) को फंड देने की पुष्टि हुई है. टीपीसी को लेवी देने के लिए ही उसने ऊंची दर पर मगध और आम्रपाली प्रोजेक्ट से कोयला ढुलाई का ठेका लिया था.
टेरर फंडिंग के ये हैं आरोपी
टेरर फंडिंग मामले के आरोपियों में नक्सली संगठन टीपीसी के रीजनल कमांडर और जोनल कमांडर कोहराम उर्फ लक्ष्मण गंझू, रीजनल कमांडर आक्रमण उर्फ रवींद्र गंझू उर्फ नेताजी, आधुनिक पावर के तत्कालीन महाप्रबंधक महेश अग्रवाल, बीकेबी ट्रांसपोर्ट के उपाध्यक्ष विनीत अग्रवाल, सोनू अग्रवाल उर्फ अमित अग्रवाल, कारोबारी सुदेश केडिया, ट्रांसपोर्टर सुधांशु रंजन उर्फ छोटू सिंह, अजय सिंह, मास्टरमाइंड सुभान खान, क्षेत्रीय कमांडर ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता, बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदु गंझू, भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू, प्रदीप राम, विनोद गंझू, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू और अनिश्चय गंझू शामिल हैं.
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