Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने विज्ञापन संख्या 21/2016 के तहत नियुक्त 34 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों (TGT) को बड़ी राहत दी है. जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट ने शंकर नायक एवं अन्य की याचिका में आदेश दिया कि इन शिक्षकों को फरवरी 2019 से काल्पनिक (notional) नियुक्ति तिथि दी जाए. इन्हें वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और उन्नत वेतनमान जैसे सभी परिणामी लाभ मिलेंगे, सिर्फ बकाया वेतन (back wages) नहीं. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा.
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झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने 2016 में TGT के पदों के लिए विज्ञापन निकाला था. इसमें अनुसूचित जिलों में 100% स्थानीय आरक्षण का प्रावधान था. याचिकाकर्ताओं ने अपने-अपने जिलों गुमला, लोहरदगा और रांची से आवेदन किया और मुख्य परीक्षा दी. इसी बीच सोनी कुमारी बनाम झारखंड राज्य मामले में हाईकोर्ट की फुल बेंच ने 21 सितंबर 2020 को 100% आरक्षण वाली अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने सत्यजीत कुमार बनाम झारखंड राज्य (2022) में नई भर्ती का निर्देश रद्द करते हुए इसी विज्ञापन के तहत पूरे राज्य की संशोधित मेरिट सूची बनाने को कहा. इसके बाद याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति लातेहार के जिला शिक्षा पदाधिकारी ने मई, अगस्त और अक्टूबर 2023 में की. वहीं इसी विज्ञापन के तहत लातेहार मंग दूसरे उम्मीदवार 9 फरवरी 2019 को ही नियुक्त हो चुके थे.
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने कहा कि नियुक्ति में देरी मुकदमेबाजी के कारण हुई, इसमें शिक्षकों की कोई गलती नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला 10 जुलाई 2026 को अजय कुमार बनाम झारखंड राज्य (W.P.(S) 2049/2025) में दिए गए फैसले से पूरी तरह कवर होता है. उनके अनुसार लाभ न देना संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन होगा.
सरकार ने न तो नियुक्ति पर और न ही अजय कुमार फैसले के लागू होने पर आपत्ति जताई. उसने सिर्फ इतना कहा कि हर याचिकाकर्ता का दावा रिकॉर्ड की जांच के बाद संबंधित अधिकारी देखें.
कोर्ट ने कहा कि देरी के लिए याचिकाकर्ता जिम्मेदार नहीं हैं और एक ही चयन प्रक्रिया से चुने जाने के बाद उन्हें वरिष्ठता में नुकसान नहीं होना चाहिए. कोर्ट ने "actus curiae neminem gravabit" यानी "कोर्ट के किसी कार्य से किसी को नुकसान नहीं होना चाहिए" के सिद्धांत का हवाला दिया. साथ ही कहा कि समान स्थिति वाले लोगों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए, इसलिए लाभ से वंचित करना मनमाना होगा.
लातेहार जिले में फरवरी 2019 में नियुक्त हुए उम्मीदवारों की तिथि से काल्पनिक नियुक्ति तिथि दी जाए. वरिष्ठता, वेतन वृद्धि, उन्नत वेतनमान और काल्पनिक आधार पर वेतन निर्धारण जैसे सभी लाभ मिलें, बकाया वेतन नहीं. यह प्रक्रिया आदेश की प्रति मिलने के 12 सप्ताह के भीतर पूरी हो. इन आदेशों के साथ कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली.
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