Dhanbad News: शहर में रक्तदान को महादान बताने वाले अभियान लगातार चलते हैं. सामाजिक संस्थाएं शिविर लगाकर जरूरतमंदों के लिए रक्त जुटाती है. दावा है कि थैलेसीमिया के मरीजों को हर महीने आसानी से और निशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है. लेकिन इन दावों के बीच धनसार के नई दिल्ली निवासी थैलेसीमिया पीड़ित जितेंद्र साव की परेशानी व्यवस्था की हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है. परिवार का पेट पालने के लिए टोटो चलाने वाले जितेंद्र आज खुद अपनी जिंदगी बचाने के लिए टोटो लेकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं. पिछले दस दिनों से उन्हें A+ ब्लड की तलाश है, लेकिन अब तक रक्त की व्यवस्था नहीं हो सकी है.
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थैलेसीमिया ऐसी बीमारी है जिसमें मरीजों को नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है. जितेंद्र साव भी हर महीने रक्त चढ़वाते हैं. इस बार एक माह से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन उन्हें अब तक रक्त नहीं मिल पाया है. पिछले दस दिनों से वह A+ ब्लड की व्यवस्था के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं. इसके बावजूद उनकी परेशानी दूर नहीं हुई है.
धनबाद में कई सामाजिक संस्थाएं समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित करती हैं. इन शिविरों के माध्यम से जुटाया गया रक्त जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए ब्लड बैंकों तक पहुंचाया जाता है. इसके बावजूद यदि थैलेसीमिया से पीड़ित मरीज को भी समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
जितेंद्र साव की समस्या सिर्फ एक मरीज तक सीमित नहीं है.यह उन तमाम लोगों की चिंता को सामने लाती है जिन्हें इलाज के लिए नियमित रूप से रक्त की जरूरत पड़ती है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बार-बार अस्पतालों के चक्कर लगाना और रक्त की व्यवस्था करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.
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