Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

हेमंत सोरेन के प्रयासों से बदली लातेहार के बूढ़ा पहाड़ की तस्वीर, विकास-शिक्षा नई पहचान

लातेहार जिले का बूढ़ा पहाड़ कभी झारखंड में नक्सल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था. यह इलाका लंबे समय तक नक्सलियों के प्रभाव में रहा, जहां जन अदालतें लगती थीं और पूरे क्षेत्र में भय का माहौल कायम रहता था.
Advertisement
Advertisement

Latehar: लातेहार जिले का बूढ़ा पहाड़ कभी झारखंड में नक्सल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था. यह इलाका लंबे समय तक नक्सलियों के प्रभाव में रहा, जहां जन अदालतें लगती थीं और पूरे क्षेत्र में भय का माहौल कायम रहता था. हालात इतने गंभीर थे कि ग्रामीणों का घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता था. चारों ओर गोलियों की आवाजें गूंजती थीं और आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहता था.

 

लेकिन अब बूढ़ा पहाड़ की तस्वीर तेजी से बदल रही है. झारखंड सरकार की योजनाओं और प्रशासनिक सक्रियता ने इस इलाके को नई दिशा दी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में लागू किए गए बीपीडीपी प्लान के तहत यहां विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है.

 

सरकार ने सबसे पहले बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया. सड़कों का निर्माण हुआ, जिससे दूर-दराज के गांव मुख्यधारा से जुड़े. इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय पहल की गई. जहां कभी स्कूलों का नामोनिशान नहीं था, वहां अब बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं. ककहरा सीखते बच्चों की आवाज आज इस क्षेत्र में शांति और बदलाव का प्रतीक बन चुकी है.

 

इस सकारात्मक परिवर्तन में पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका भी बेहद अहम रही है. लगातार चलाए गए अभियान और सख्त कार्रवाई के चलते नक्सलियों की पकड़ कमजोर पड़ी है. सुरक्षा बलों ने न सिर्फ इलाके को सुरक्षित बनाया, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच भरोसा भी कायम किया. आज ग्रामीण बिना किसी डर के अपने दैनिक जीवन को आगे बढ़ा रहे हैं.

 

सरकार की विकास योजनाओं का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है. स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सुधार से लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आया है. ग्रामीणों को अब यह भरोसा हो चला है कि उनका क्षेत्र भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुका है.

 

बूढ़ा पहाड़, जो कभी दहशत और असुरक्षा का प्रतीक था, अब शांति, शिक्षा और विकास की नई मिसाल बन रहा है. यह बदलाव बताता है कि सही नीति, मजबूत इच्छाशक्ति और प्रशासनिक समन्वय से सबसे कठिन परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है. आज यहां की फिजां में गोलियों की आवाज नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई की गूंज सुनाई देती है—और यही इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान है.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

 

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही