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मां भगवती केरा मंदिर में 1 अप्रैल से शुरू होगा शुभ घट यात्रा, अंगारों पर चलकर आस्था जताएंगे श्रद्धालु

पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर शहर से लगभग आठ किलोमीटर दूर केरा गांव में स्थित माता भगवती मंदिर करीब 400  साल पुराना आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
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Chakradharpur (Shambhu Kumar) : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर शहर से लगभग आठ किलोमीटर दूर केरा गांव में स्थित माता भगवती मंदिर करीब 400  साल पुराना आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

 

केरा का चैत्र मेला पूरे झारखंड में प्रसिद्ध है, जहां तांत्रिक और वैदिक दोनों विधियों से मां की आराधना की जाती है.यहा श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर आग पर चलते हैं और कांटों की सेज पर लेटकर माँ के प्रति अटूट विश्वास दिखाते हैं.

 

साथ ही राजबाड़ी और मंदिर परिसर में छऊ नृत्य, पारंपरिक नाटक और 'गरिया भार' का आयोजन किया जाता है.यह मंदिर एक पर्यटन स्थल का रूप ले चुका है.प्रतिदिन दूर-दराज से सैंकड़ो भक्तों का आवागमन होता हैं.वर्तमान मैं इसकी देख रेख केरा राज परिवार करते है.

 

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राजा ने कराया था मंदिर का निर्माण

 

बताया जाता है कि लगभग 400 साल पहले, असम (कामरूप कामाख्या) से एक सिद्ध साधु मां भगवती की दिव्य प्रतिमा लेकर केरा पहुंचे थे. उन्होंने नदी किनारे एक शांत वृक्ष के नीचे अपनी तपस्या प्रारंभ की थी.संयासी ने वर्षों मां की जप-तप साधना करते हुए उसी बर वृक्ष के नीचे अपना जीवन त्याग दिया था. 

 

उन्होंने मां को एक झोपड़ी में घेर कर छोड़ दिया था. कथन अनुसार वो प्रतिमा क़रीब 500 साल पुराना है जो वो कामाख्या से उस सन्यासी के पूर्वज वहां से सिद्ध कर के लाए थे.संयासी की मृत्यु के दूसरे दिन राजा साहेब लोकनाथ सिंहदेव को मां का स्वप्न हुआ. 

 

मां ने स्वप्न में कहा- मैं तुम्हारे राज्य की रक्षा हेतु तुम्हारी नदी के किनारे आ बसी हूं और तुम मेरा दर्शन कर मेरी उपासना करो तथा झोपड़ी (मंदिर) की रक्षा करो.राजा दूसरे दिन उस स्थान पर पैदल चलकर पहुंचे. राजा ने पाया कि जैसा उन्होंने स्वप्न में देखा था वैसी ही देवी की एक प्रतिमा वहां पेड के नीचे विराजमान थी. राजा के आदेश पर तुरंत मंदिर बनाये गये.

 

मां की पूजा-पाठ होने के बाद प्रतिवर्ष 12 अप्रैल की रात गरिया भर नृत्य का आयोजिन किया जाता है. यह आयोजन भी राजा साहेब लोकनाथ सिंहदेव द्वारा किया जाता था और अप्रैल माह के 9-14 तक नीति नियम के तहत मां भगवती की पूजा अर्चना होती है.

 

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सात बहने हैं माता केरा


धार्मिक मान्यता के अनुसार केरा गांव स्थित माता भगवती कुल सात बहनें हैं. इनमें कंसरा मां ,रंकिणी मां ,आर्किषीणी मां ,तारणी मां ,दिउड़ी मां ,एवं पाऊड़़ी मां है. सभी मंदिर से श्रेष्ठ रूप में मां केरा इस क्षेत्र में मानी जाती हैं


1 अप्रैल को निकाला जाएगा शुभ घट

1.शुभ घट : तिथि: 01-04-2026

2. यात्रा घट: तिथि: 10-04-2026 

3. वृंदावन यात्रा, चटिया चटणी : तिथि: 11-04-2026 

4. गरियाभार यात्रा, राजबाड़ी में रात्रि में छऊ नृत्य : तिथि: 12-04-2026 (चैत्र 29 दिन रविवार) शुभ समय: सूर्यास्त से रात्रि 01.10 तक

5. मेलु जलाभिषेक, मंदिर परिसर में रात्रि में छऊ नृत्य : तिथि: 13-04-2026 (चैत्र 30 दिन सोमवार)

6. श्री कालिका घट : तिथि: 14-04-2026 (बैशाख 1 दिन मंगलवार) शुभ समय: पूर्व रात्रि से प्रातः 07.01 मिनट तक

 

यहां कैसे पहुंचें


• रेल मार्ग: चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन (करीब 7-9 KM की दूरी पर).
• वायु मार्ग: रांची हवाई अड्डा (करीब 110 KM की दूरी पर).
• विशेष तिथि: हर साल 13 और 14 अप्रैल को यहाँ लाखों श्रद्धालुओं का संगम होता है.

 


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