Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

हजारीबाग में नाबालिग के साथ दरिंदगी पर HC ने लिया स्वत: संज्ञान, DGP, SP व गृह सचिव को जवाब तलब

Ranchi : हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के कोसुंभा गांव में 12 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या मामले को झारखंड हाईकोर्ट ने  गंभीरता से लिया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के डीजीपी, गृह सचिव एवं एसपी हजारीबाग को नोटिस जारी कर उन्हें जवाब दाखिल करने को कहा है.

 

खंडपीठ ने मामले को सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के पास भेज दिया है. अधिवक्ता हेमंत शिकरवार ने इस मामले को कोर्ट के समक्ष रखा और इससे संबंधित सामाचर पत्रों की कटिंग प्रस्तुत की. उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्होंने आज डीजीपी और एसपी को एक पत्र लिखा है और पीड़ित पक्ष को सुरक्षा दिलाने का आग्रह किया है. साथ ही साइंटिफिक तरीके से अनुसंधान करने को कहा है.

आपने पहले पढ़ा...

 

सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात लाई गई कि यह मामला दिल्ली के निर्भया कांड की तरह है. इसमें बच्ची के प्राइवेट पार्ट के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया है. कोर्ट ने कहा कि यह घटना घृणित और मानवता को शर्मसार करने वाली है.

 

कोर्ट के समक्ष उक्त घटना से संबंधित पेपर की कटिंग प्रस्तुत की गई, जिसे कोर्ट ने गंभीर मामला मानते हुए तुरंत झालसा सचिव एवं हजारीबाग एसपी को वर्चुअल तलब किया. कोर्ट को बताया गया कि बच्ची के साथ रेप और मर्डर की घटना 24 मार्च को हुई. 25 मार्च को घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई.

 

देर से प्राथमिकी दर्ज करने को हाईकोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया. कोर्ट में वर्चुअल उपस्थित हजारीबाग एसपी से खंडपीठ ने पूछा कि अब तक इस मामले में क्या अनुसंधान हुआ है? मामले में साइंटिफिक जांच की गई है या नहीं? इस पर उनकी ओर से बताया गया कि अनुसंधान जारी है. मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी को पकड़ने की कोशिश की जा रही है.

 

जिस पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि 6 दिन से अधिक का समय बीत गया और आरोपी को अपने अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया? मृतक बच्ची के कपड़े एवं अन्य साक्ष्य फॉरेंसिक के लिए भेजे गए हैं या नहीं? 5 दिन की देरी से फॉरेंसिक जांच प्रभावित हो सकती है. 

 

कोर्ट ने कहा कि अगर समाचार पत्रों के माध्यम से यह घटना  सामने नहीं आती तो कोर्ट के समक्ष इसकी जानकारी नहीं हो सकती थी.

 

क्या है मामला

कोर्ट के समक्ष सोमवार को प्रकाशित एक स्थानीय समाचार पत्र की खबर रखी गई, जिसमें बताया गया कि 24 मार्च को 12 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई. रिपोर्ट के अनुसार बच्ची की जीभ काट दी गई थी और उसके निजी अंगों पर गंभीर चोट के निशान थे

 

पुलिस की “लचर कार्यशैली” करार दिया

खंडपीठ ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि घटना के पांच दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. कोर्ट ने इसे पुलिस की “लचर कार्यशैली” करार दिया. सुनवाई के दौरान हजारीबाग के एसपी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए और बताया कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. कोर्ट ने यह भी पाया कि घटना से जुड़े अहम साक्ष्य (सैंपल) अभी तक फॉरेंसिक जांच (FSL) के लिए नहीं भेजे गए हैं. इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि साक्ष्यों को जांच अधिकारी के पास रखना जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है.


 
पीड़ित परिवार या गवाहों के साथ कोई अनहोनी पर जिम्मेदारी SP की

खंडपीठ को बताया गया कि पीड़िता की मां, जो ईंट-भट्ठे में काम करती है, को धमकाया जा रहा है और साक्ष्य से छेड़छाड़ की कोशिश हो रही है. इस पर कोर्ट ने चिंता जताते हुए परिवार और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने डीजीपी को जांच में देरी और सैंपल FSL न भेजने के कारणों की जांच करने का आदेश दिया है.

 

JHALSA को पीड़ित परिवार की सहायता और साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि पीड़ित परिवार या गवाहों के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी एसपी हजारीबाग की होगी. मामले को अब मुख्य न्यायाधीश के समक्ष आगे की सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया जाएगा.

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही