Ranchi : झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक नया धार्मिक माहौल देखने को मिल रहा है. हर दल दावा कर रहा है कि उसके विधायक पूरी तरह निष्ठावान हैं, अडिग हैं, अटल हैं और कहीं जाने वाले नहीं हैं. लेकिन फिर भी उन्हें होटल में रखा जा रहा है. इसका मतलब साफ है कि भरोसा तो है, मगर राजनीति में अतिरिक्त भरोसा नाम की भी एक चीज होती है.
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव सिर्फ वोट का नहीं, बल्कि लक्ष्मी जी के दर्शन की चर्चाओं का भी मौसम होता है. हालांकि कोई खुलकर कुछ नहीं कहता, लेकिन फुसफुसाहटें इतनी तेज होती हैं कि कई बार माइक भी शर्मा जाए.
एक वरिष्ठ राजनीतिक पर्यवेक्षक ने मजाक में कहा कि झारखंड में विधायक दो तरह के होते हैं. एक वे जो विचारधारा देखते हैं और दूसरे वे जिन पर चुनाव के समय लक्ष्मी जी की कृपा होने की अफवाहें उड़ने लगती हैं.
सोशल मीडिया पर भी खूब मजे लिए जा रहे हैं. एक पोस्ट में लिखा गया—राज्यसभा चुनाव में विधायक जी का भाव शेयर बाजार से भी तेज चढ़ता है. दूसरे ने लिखा- इन दिनों नेता लोग विधायक को ऐसे संभाल रहे हैं जैसे बैंक वाला कैश वैन को संभालता है.
उधर, विधायक भी कम परेशान नहीं हैं. कोई होटल में बैठा है, कोई बैठक में. कोई मोबाइल बंद नहीं कर सकता, कोई ज्यादा खुलकर हंस नहीं सकता. क्योंकि आजकल अगर विधायक जी किसी से ज्यादा देर बात कर लें तो राजनीतिक विश्लेषक उसमें भी नया समीकरण खोज लेते हैं.
राजनीति के जानकार कहते हैं कि चुनाव के समय अचानक सभी विधायकों का महत्व बढ़ जाता है. जो नेता कल तक उन्हें नाम से बुलाते थे, आज माननीय विधायक जी कहकर हालचाल पूछ रहे हैं. चाय, नाश्ता, भोजन, बैठक—सब कुछ समय पर. विधायक भी सोच रहे होंगे कि काश राज्यसभा चुनाव हर छह महीने पर हो जाता!
फिलहाल रांची में चर्चा यह नहीं है कि कौन जीतेगा, बल्कि यह है कि किस पर लक्ष्मी जी की कृपा होने की चर्चा सबसे ज्यादा है. हालांकि यह सिर्फ राजनीतिक गपशप है, सच क्या है यह तो वोटों की गिनती ही बताएंगे.
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