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सदर अस्पताल में 50 करोड़ के कथित घोटाले के आरोपों पर सिविल सर्जन ने दी सफाई

सदर अस्पताल में 50 करोड़ रुपए के कथित घोटाले के भाजपा के आरोपों पर सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने दी सफाई. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी घोटाले का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन से जुड़ा है.
 

Ranchi : सदर अस्पताल में 50 करोड़ रुपए के कथित घोटाले के भाजपा के आरोपों पर सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने दी सफाई. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी घोटाले का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन से जुड़ा है.

 

डॉ प्रभात कुमार ने बताया कि प्रस्तावित 50 करोड़ की राशि में से लगभग 48 करोड़ रुपए कर्मचारियों के वेतन भुगतान में सीधे उनके खातों में जाएंगे, जबकि शेष राशि का अधिकतम 4 प्रतिशत, यानी करीब 2 करोड़ रुपए, एजेंसी को सेवा शुल्क के रूप में दिया जाएगा. यह भुगतान झारखंड सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा.

 

उन्होंने कहा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी कार्य पूर्ण पारदर्शिता के साथ किए जाएं और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि यह टेंडर अभी जारी नहीं हुआ है, बल्कि केवल प्री-बिड बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में 15 कंपनियों ने भाग लिया और अपने सुझाव साझा किए. प्रस्ताव में झारखंड की कंपनियों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है.

 

वर्ष 2022 में सदर अस्पताल में 200 बेड थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या 825 तक पहुंच चुकी है. साथ ही, अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में मिलाकर जिले के अधीन कुल 1500 से अधिक बेड संचालित हैं. कार्य की बढ़ती क्षमता को देखते हुए निविदा की राशि और शर्तें तय की गई हैं.

 

निविदा की अनुमानित लागत 15 करोड़ से अधिक है, जिसमें बोली लगाने वाली एजेंसियों से न्यूनतम दो वर्क ऑर्डर 10 या 15 करोड़ के अनुभव की मांग की गई है. रांची, सदर अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में लगभग 1500 कर्मचारी आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत हैं. इसी आधार पर इस निविदा मं  1500 कर्मचारियों की संख्या तय की गई है.

 

सिविल सर्जन ने बताया कि वर्ष 2022 में 300 के करीब कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर कार्यरत थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 1500 हो गई है. इसलिए इस बार का टेंडर 25 करोड़ रुपए का रखा गया है ताकि सभी कर्मचारियों का वेतन और अन्य भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जा सके.

 

उन्होंने यह भी कहा कि सभी एजेंसियों को नोटराइज्ड शपथ पत्र देना अनिवार्य किया गया है, जिसमें यह उल्लेख होगा कि वे किसी भी प्रकार की ब्लैकलिस्टिंग में शामिल नहीं हैं. यदि भविष्य में किसी एजेंसी द्वारा गलत जानकारी दी जाती है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी.

 

डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि पूरी प्रक्रिया झारखंड प्रोक्योरमेंट पॉलिसी, सीवीसी और जीएफआर के प्रावधानों के अनुरूप की जा रही है. उन्होंने दोहराया कि सदर अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में सेवा गुणवत्ता बढ़ाने के साथ पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

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