- एक ही खेत में कई फसलें, दूसरे किसानों के लिए मिसाल
- मवेशियों से फसल बचाने की चुनौती, घेराबंदी की मांग
- समय पर बीज उपलब्ध कराने का मिला आश्वासन
Dhanbad News: खेतों में लहलहाती सब्जियां, आधुनिक खेती का तरीका और कम जमीन में बेहतर उत्पादन की कोशिश. पूर्वी टुंडी के भोजपुर गांव में शुक्रवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जब झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने प्रगतिशील किसान शिशिर गोराई के खेतों का निरीक्षण किया. करीब साढ़े तीन एकड़ में हो रही विविध फसलों की खेती देखकर उन्होंने किसान के प्रयासों की सराहना की. हालांकि इस दौरान किसानों ने खेती में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को भी सामने रखा और उनके समाधान की मांग की.
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निदेशक अपने धनबाद दौरे के क्रम में पूर्वी टुंडी प्रखंड के भोजपुर गांव पहुंचे थे. उनके साथ जिला कृषि पदाधिकारी अंजना कुमारी सहित कृषि विभाग की टीम मौजूद थी. निरीक्षण के दौरान उन्होंने खेतों में उगाई जा रही विभिन्न फसलों को देखा और खेती के तौर-तरीकों की जानकारी ली.
प्रगतिशील किसान शिशिर गोराई करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर आधुनिक तरीके से विभिन्न फसलों की खेती कर रहे हैं. उनके खेतों में बैंगन, करेला, खीरा, हल्दी, अदरक, गेंदा फूल, केला और नेनुआ की खेती की जा रही है. एक ही क्षेत्र में अलग-अलग फसलों की खेती के इस प्रयास को कृषि निदेशक ने सराहा. यह मॉडल क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी विविध खेती के लिए प्रेरित कर सकता है.
निरीक्षण के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं भी खुलकर रखीं. किसान शिशिर गोराई और धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि खुले में घूमने वाले मवेशी खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे किसानों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है. फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों की घेराबंदी जरूरी है.
किसानों ने सिंचाई की बेहतर व्यवस्था के लिए डीप बोरिंग कराने और खेती के अनुकूल मौसम में उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने की भी मांग की. उनका कहना था कि समय पर बीज और पर्याप्त सिंचाई की सुविधा मिलने से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी.
किसानों की समस्याएं सुनने के बाद कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया.उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा. आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझने के लिए विभाग लगातार काम कर रहा है.
निदेशक ने बताया कि जिले में पांच विशेष टीमों का गठन किया गया है. ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर खेती की स्थिति का जायजा ले रही हैं और किसानों से फीडबैक प्राप्त कर रही हैं ताकि उनकी जरूरतों के अनुरूप योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके.
भोजपुर गांव में कृषि निदेशक के दौरे से किसानों को अपनी समस्याएं सीधे विभाग तक पहुंचाने का मौका मिला. अब किसानों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि खेतों की घेराबंदी, सिंचाई और उन्नत बीज जैसी मांगों पर कब तक ठोस पहल होती है.
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