- पलामू में डीएमओ सुनील कुमार की भूमिका अहम, चार बालू घाटों की नीलामी से सरकार को ₹26.58 करोड़ से अधिक राजस्व मिलने का अनुमान
- 50 राउंड तक चली बोली, चार बालू घाटों के लिए 13 कारोबारियों ने आजमाई किस्मत; अब तक पांच घाटों की नीलामी पूरी
Palamu News : पलामू में बालू घाटों की नीलामी ने राजस्व के मामले में नया रिकॉर्ड कायम किया है. शुक्रवार को कैटेगरी-2 के चार बालू घाटों की ऑनलाइन नीलामी से राज्य सरकार को ₹26.58 करोड़ से अधिक राजस्व मिलेगा. सबसे ज्यादा बोली विश्रामपुर प्रखंड के लालगढ़ बालू घाट के लिए लगी, जबकि पांकी प्रखंड के बरवैया बालू घाट पर न्यूनतम निर्धारित राशि से करीब पांच गुना अधिक बोली लगाई गई. जिला प्रशासन के अनुसार, नीलामी प्रक्रिया में कुल 13 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.
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जिला प्रशासन ने 9 अक्टूबर को JharkhandTenders पोर्टल के माध्यम से चार बालू घाटों की नीलामी कराई. इसमें कुल ₹26,58,73,000 की उच्चतम बोलियां प्राप्त हुईं. बरवैया बालू घाट की नीलामी के दौरान करीब 50 राउंड तक बोली लगाई गई. न्यूनतम बोली ₹1.29 करोड़ निर्धारित थी, लेकिन कमलेश प्रसाद ने ₹5.25 करोड़ से अधिक की बोली लगाकर घाट हासिल किया. जिला प्रशासन ने इसे बालू घाटों की नीलामी के लिहाज से राज्य स्तर पर उल्लेखनीय बताया है.
लालगढ़ घाट के लिए 11.56 करोड़ की बोली
चारों बालू घाटों में लालगढ़ घाट सबसे महंगा रहा. विश्रामपुर प्रखंड स्थित इस घाट के लिए प्रमोद प्रसाद ने 11,56,28,600 की उच्चतम बोली लगाई. वहीं, लेस्लीगंज प्रखंड के मिसिर पतरा बालू घाट के लिए अमित कुमार सिन्हा ने 6,16,40,500 की बोली लगाई.
पांकी प्रखंड के बरवैया बालू घाट को कमलेश प्रसाद ने 5,25,45,300 में हासिल किया. जबकि हैदरनगर प्रखंड के कबरा कला बालू घाट के लिए शशिकांत गुप्ता उर्फ गुड्डू गुप्ता ने 3,60,58,600 की उच्चतम बोली लगाई.
पांच बालू घाटों की नीलामी पूरी
जिला प्रशासन के अनुसार, इससे पहले कांके खुर्द बालू घाट की नीलामी भी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है. इसके साथ ही पलामू जिले में कैटेगरी-2 के कुल पांच बालू घाटों की नीलामी पूरी हो गई है. चार घाटों से प्राप्त उच्चतम बोलियों की कुल राशि 26.58 करोड़ से अधिक है. कांके खुर्द घाट की राशि इसमें शामिल नहीं है.
अवैध खनन पर लगाम लगाने का दावा
जिला खनन पदाधिकारी सुनील कुमार ने सफल निविदादाताओं से निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए बालू घाटों का संचालन करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन घाटों के सुचारू और नियमानुसार संचालन में सहयोग करेगा.
प्रशासन का दावा है कि बालू घाटों की नीलामी से जिले में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और निर्माण कार्यों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी. साथ ही, बालू के अवैध खनन और परिवहन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी.
हालांकि, नीलामी से राजस्व प्राप्त होना और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होना दो अलग-अलग बातें हैं. अब निगाह इस पर रहेगी कि सफल निविदादाता निर्धारित शर्तों के तहत घाटों का संचालन कैसे करते हैं और प्रशासन अवैध खनन एवं परिवहन पर कितनी प्रभावी निगरानी रखता है.
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