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राज्य के जर्जर स्कूल भवनों और शिक्षकों की रिक्तियों पर हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

Ranchi :   राज्य के स्कूलों की बदहाल स्थिति और जिला स्कूल, रांची (अब सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) में बुनियादी सुविधाओं पर कोर्ट के स्वतः संज्ञान पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.

 

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी, जर्जर भवनों और शिक्षकों के रिक्त पदों के मुद्दे पर चिंता जताई.

 

जर्जर स्कूल भवनों व शिक्षकों रिक्तियों पर मांगी रिपोर्ट

खंडपीठ ने सख्त रवैया अपनाते हुए स्कूल के जर्जर भवनों और बिना छत वाले स्कूलों की सूची मांगी है. कोर्ट में उपस्थित एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) ने आश्वासन दिया कि वह जल्द ही एक विस्तृत चार्ट/नोट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेंगे.

 

इस चार्ट में राज्य के उन स्कूलों की जानकारी होगी, जो जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, बिना छत या बुनियादी सुविधाओं के चल रहे हैं और  न्यूनतम आधारभूत संरचना से भी वंचित हैं.

 

इसके साथ ही शिक्षकों की रिक्तियों की स्थिति पर भी अलग रिपोर्ट देने का भरोसा दिलाया. मामले में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) की ओर से समय की मांग की गई. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी निर्धारित की है.  

 

जिला स्कूल की पुरानी प्रतिष्ठा लौटाने का हरसंभव प्रयास करेंगे

वहीं खंडपीठ ने जिला स्कूल रांची के कायाकल्प को लेकर दूसरी जनहित याचिका, जो “जिला स्कूल, रांची” (अब सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) से संबंधित है, उस पर भी सुनवाई की. 

 

मामले में महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सभी संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाकर स्कूल की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

 

महाधिवक्ता ने कहा कि जिला स्कूल को उसकी पुरानी प्रतिष्ठा और गौरव लौटाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे. कोर्ट ने महाधिवक्ता की पहल की सराहना करते हुए भरोसा जताया कि जल्द ही जिला स्कूल रांची के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा.

 

कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 12 मार्च को करेगा.  

 

दोनों पीआईएल पर अब अलग-अलग सुनवाई होगी

कोर्ट ने इन दोनों जनहित याचिका को अलग करते हुए स्पष्ट किया कि एक जनहित याचिका राज्य के कई स्कूलों से जुड़ा व्यापक मामला है. जबकि दूसरी जनहित याचिका केवल जिला स्कूल रांची तक सीमित है. इसलिए दोनों पीआईएल पर अलग-अलग सुनवाई होगी.

 

 

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