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हाईकोर्ट ने चाईबासा कोर्ट का फैसला बदला, हत्या के दोषियों की उम्रकैद की सजा रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में फैसला सुनाते हुए चाईबासा कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा को रद्द करते हुए दोनों आरोपियों को राहत प्रदान की है.
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Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में फैसला सुनाते हुए चाईबासा कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा को रद्द करते हुए दोनों आरोपियों को राहत प्रदान की है.

 

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी कड़ी स्थापित करने में असफल रहा है. यह फैसला दो क्रिमिनल अपील में सुनाया गया.

 

दोनों अपीलें पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा स्थित सत्र न्यायालय द्वारा 10 अप्रैल 2017 को दिए गए दोषसिद्धि निर्णय के खिलाफ दायर की गई थीं. 

 

दो संभावनाएं हों तो आरोपी को संदेह का लाभ मिलना चाहिए

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य के मामलों में दोषसिद्धि तभी संभव है, जब साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला बिना किसी संदेह के आरोपी की ओर ही इशारा करे.

 

लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हो सका. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आपराधिक मामलों में यदि दो संभावनाएं हों-एक आरोपी के दोषी होने की और दूसरी निर्दोष होने की, तो कानून के अनुसार आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए. 

 

जानें क्या था मामला 

अभियोजन के अनुसार, आरोपी मंगरा चांपिया मृतक लक्ष्मण चांपिया को घर की नींव खोदने के बहाने जंगल क्षेत्र में ले गया था. बाद में जंगल से उसका शव बरामद हुआ. आरोप लगाया गया कि मंगरा ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर पत्थरों से हमला कर लक्ष्मण की हत्या कर दी. 

 

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद नहीं था. अधिकांश गवाहों ने कोर्ट में अभियोजन का समर्थन नहीं किया और उन्हें होस्टाईल (hostile) घोषित कर दिया गया. 

 

जब्त किए गए खून लगे पत्थर, मिट्टी और कपड़ों की बरामदगी पर भी गवाहों ने संदेह जताया. एफएसएल रिपोर्ट और जब्ती सूची में भी विरोधाभास सामने आया, जिससे बरामदगी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए. 

 

 

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