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खनन क्षेत्रों के विकास में DMFT फंड के सही इस्तेमाल का मुद्दा सदन में उठा, दायरा बढ़ाने पर भी चर्चा

झारखंड विधानसभा में खनन क्षेत्रों के विकास और DMFT फंड के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई. विधायक प्रदीप यादव ने खान एवं भूतत्व विभाग से पूछा कि क्या भारत सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार खनन क्षेत्र के 30 किलोमीटर के दायरे में ही DMFT फंड से विकास कार्य करने का प्रावधान तय किया गया है.
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  • विधायक प्रदीप यादव ने उठाया विकास में असंतुलन का मुद्दा
  • दायरा बढ़ाने और फंड के सही उपयोग पर हुई चर्चा
  • बाबूलाल ने डीएमएफटी राशि की निगरानी के लिए टीम बनाने का दिया सुझाव

Ranchi :  झारखंड विधानसभा में खनन क्षेत्रों के विकास और DMFT फंड के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई. विधायक प्रदीप यादव ने खान एवं भूतत्व विभाग से पूछा कि क्या भारत सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार खनन क्षेत्र के 30 किलोमीटर के दायरे में ही DMFT फंड से विकास कार्य करने का प्रावधान तय किया गया है.

 

विधायक ने सदन में कहा कि इस व्यवस्था के कारण DMFT फंड जिले के कुछ सीमित हिस्सों में ही खर्च हो जाता है, जिससे अन्य प्रभावित क्षेत्र विकास से वंचित रह जाते हैं और क्षेत्रीय असंतुलन की स्थिति पैदा होती है. उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या समावेशी और संतुलित विकास के लिए कोई नई योजना शुरू करने पर विचार किया जा रहा है.

 

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सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र महतो ने कहा कि Jharkhand District Mineral Foundation (Trust) Rules, 2024 के नियम 5(ए) के अनुसार, खनन पट्टा क्षेत्र से सीधे प्रभावित क्षेत्र (15 किमी) और नियम 5(बी) के तहत अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र (25 किमी) में प्राप्त DMFT फंड का उपयोग PMKKKY Guidelines, 2024 के तहत किया जाता है.

 

प्रभावित लोगों की पहचान ग्राम सभा या शहरी निकायों के स्थानीय/निर्वाचित प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद की जाती है और उसी आधार पर फंड का उपयोग किया जाता है. इस पर विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि पूरे जिले में समुचित विकास कैसे सुनिश्चित होगा. इस पर सरकार को स्पष्ट नीति बतानी चाहिए. 

 

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सारंडा क्षेत्र में आयरन ओर की खदानें हैं और 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में गांवों की संख्या सीमित है, ऐसे में DMFT फंड का पूरा उपयोग नहीं हो पाएगा और राशि बची रह सकती है.

 

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वहीं मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष सहमत हों तो इस मुद्दे पर सदन में प्रस्ताव भी लाया जा सकता है. जबकि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि फिलहाल 15 और 25 किलोमीटर के दायरे में DMFT फंड खर्च करने का प्रावधान है.

 

पहले यह देखना जरूरी है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में इस राशि का सही उपयोग हो रहा है या नहीं. उन्होंने कहा कि कई मामलों में DMFT फंड के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आई हैं. सुझाव दिया कि दायरा बढ़ाने से पहले फंड के उपयोग की निगरानी के लिए विधानसभा की एक टीम बनाई जानी चाहिए.

 

इस पर मंत्री योगेंद्र महतो ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की चिंता जायज है. कुछ मामलों की जांच चल रही है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही नई नियमावली में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार से भी विचार-विमर्श किया जाएगा.

 

 

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