Ranchi : झारखंड में मुंडा समाज के नेताओं की हत्या ने चिंता की लकीर बढ़ा दी है. सिलसिलेवार हो रही हत्या से मुंडा नेताओं में भय और रोष दोनों है. बीते 5 वर्षों के दौरान मुंडा समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं, नेताओं और जमीनी लोगों की हत्या की गई है. इससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है. समाज में कई तरह के सवाल चर्चा के विषय बन गए हैं.
लोगों का कहना है कि जिन नेताओं ने जल-जंगल-जमीन, आदिवासी अधिकार के लिए मुखर आवाज उठाई, वही बार-बार हत्यारों के निशाने पर आए, और सभी की गोली मारकर हत्या की गई. अभी साल का पहला महीना बीता भी नहीं कि बीते 7 जनवरी को खूंटी जिले के पड़हा राजा सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
इससे पहले साल 2023 में 16 फरवरी को रामगढ़ जिले के पतरातु से सटे भदानीनगर क्षेत्र के लोवाडीह गांव (झुंझी टोला) में चिटो गांव निवासी और आजसु नेता मनोज मुंडा (35 वर्ष) की गोली मारकर हत्या कर दी गई. यह वारदात रामगढ़ विधानसभा सीट पर 27 फरवरी को होने वाले मतदान से ठीक पहले हुई, जिससे राजनीतिक साजिश की आशंका और गहरा गई.
साल 2020 में 3 मार्च को भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेमसागर मुंडा की रांची के मोरहाबादी स्थित पार्क प्राइम के पास पांच-छह अपराधियों ने घेरकर गोली मार दी. राजधानी में हुई इस वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए. साल 2023 में 26 जुलाई को सीपीआई नेता सुभाष मुंडा की दलादिली चौक स्थित पार्टी कार्यालय में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई. वहीं, साल 2021 में 22 सितंबर को भाजपा एसटी मोर्चा के ग्रामीण जिलाध्यक्ष जीतराम मुंडा (38) की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई.
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