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द लैसेंट ने वायु प्रदूषण पर भारत को आईना दिखाया. 2022 में 17 लाख मौतें हुई, किसी को परवाह नहीं

New Delhi  : वायु प्रदूषण को लेकर भारत के लिए बुरी खबर है. यहां की हवा जहरीली हो चुकी है. विश्व प्रसिद्ध पत्रिका द लैंसेट ने इस दिशा में भारत को आईना दिखाते हुए कटघरे में खड़ा किया है,  लैसेंट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में 2022 में प्रदूषण के कारण लगभग 17 लाख लोगों की मौत हुई है.


द लैंसेट के संपादक और वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ रिचर्ड हॉर्टन ने भारत के समक्ष कई सवाल खड़े किये हैं. रिचर्ड हॉर्टन ने कहा है कि भारत गंदी हवा से मर रहा है. आश्चर्य व्यक्त किया कि इसके लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा है.


संपादक ने कहा, भारत का लोकतंत्र साफ हवा की मांग भी नहीं कर रहा है. जनता भी कोई सवाल नहीं कर रही है.असली समस्या यह है कि लोगों में उदासीनता और राजनीतिक जवाबदेही की कमी है. 
 

हॉर्टन ने इंडिया टुडे को दिये साक्षात्कार में कहा, भारत एक जीवंत लोकतंत्र होने के बावजूद बढ़ते सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का सामना करने में विफल रहा है.


रिचर्ड हॉर्टन वायु प्रदूषण के संदर्भ में चीन की तारीफ करते हुए कहा कि बीजिंग जैसे शहर में सालों तक दमघोंटू हवा और प्रदूषण वातावरण रहा. लेकिन चीन ने इस स्थिति से निबटने के ठोस पहल की.


हॉर्टन ने कहा कि चीन ने शहर में मौजूद  और आसपास के इलाकों में ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगो पर ताले लगा दिये. वाहनों के इस्तेमाल पर कड़ी पाबंदियां लगा दी. प्रोफेसर हॉर्टन ने कहा, अब बीजिंग जाना हवा के मामले में गांव जाने जैसा लगता है. यह बहुत साफ और सुंदर है. 


 रिचर्ड हॉर्टन ने हैरानगी जताई हैं कि भारत में प्रदूषण जैसे गंभीर विषय पर अब तक कोई बड़ा आंदोलन शुरू नहीं हुआ है. जनता परेशान क्यों नहीं है? सरकार से सवाल क्यों नहीं पूछ रही है. यह क्यों नहीं कह रही है कि अगर सरकार वायु प्रदूषण दूर नहीं करेगा, तो हम आपको वोट नहीं देंगे और हटा देंगे.


हॉर्टन ने कहा कि प्रदूषण से होने वाली बीमारियां और मौत  धीमी गति से आती है. इस कारण  जनता के लिए पॉलिसी बनाने वाले दोनों जिम्मेदारी से बच निकलते हैं.


उन्होंने  कहा कि गंभीर स्तर के वायु प्रदूषण से कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां, सांस की समस्याएं, फेफड़ों का कैंसर भी होता है, लेकिन यह एक दिन, एक सप्ताह या एक साल में नहीं होता. उदाहरण दिया कि यदु जनवरी 2026 में जिस प्रदूषण के संपर्क में आप आयेंगे,  तो उसका असर 12, 18 या 24 महीने बाद नजर आयेगा. 

 
अहम बात है कि पिछले बुधवार को IMF की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर (अर्थशास्त्री) गीता गोपीनाथ ने जेनेवा में आटोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा कि वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा टैरिफ नहीं, वायु प्रदूषण है.


प्रदूषण की वजह से भारत को धन और इंसानी जिंदगी दोनों मामलों में भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. कहा कि इस पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए. उन्होंने वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट का हवाले से कहा, 2022 में भारत में वायु प्रदूषण के कारण लगभग 17 लाख लोगों की मौत हो गयी. 


वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की 1.4 अरब आबादी का शत-प्रतिशत प्रतिशत हिस्सा कई कारणों से हानिकारक वायु प्रदूषक PM2.5 के खतरनाक संपर्क में है. यह बड़ी चेतावनी है. 


 रिपोर्ट के अनुसार भारत के बड़े शहरों में सालों भर एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 या उससे कम नहीं रहता.  उत्तरी भारत के बड़े हिस्सों में अक्सर AQI लेवल 400 से ऊपर चला जाता है. यह काफी खतरनाक है.

 

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