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जूता उछालने वाले वकील का दावा, सनातन धर्म के साथ SC भेदभाव करता है, दूसरे समुदायों के खिलाफ केस पर तुरंत एक्शन लेता है

वकील ने कहा कि नुपुर शर्मा का मामला आया तो कोर्ट ने कहा कि आपने माहौल खराब कर दिया. साथ ही उन्होंने उदाहरण दिया कि हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर विशेष समुदाय का कब्जा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर तीन साल पहले स्टे लगाया, जो आज भी कायम है.
 

New Delhi  :  चीफ जस्टिस बीआर गवई पर जूता उछालने  वाले वकील राकेश किशोर को अपने कृत्य पर कोई अफसोस नहीं है.  उन्होंने कहा कि सीजेआई  द्वारा भगवान विष्णु पर दिये गये बयान से वे आहत हैं.  उनका टिप्पणी) पर मैंने यह किया.  मैं नशे में नहीं था. मैंने जो किया, उसका अफसोस नहीं. मुझे किसी का डर नहीं है. 

 

 

वकील राकेश किशोर का आरोप है कि दूसरे समुदायों के लोगों के खिलाफ केस आता है तो  सुप्रीम कोर्ट  तुरंत बड़े कदम उठाता है. चीफ जस्टिस बड़े-बड़े स्टेटमेंट देते हैं. उन्होंने उदाहरण दिया कि हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर विशेष समुदाय का कब्जा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर तीन साल पहले स्टे लगाया, जो आज भी कायम है. 

 

वकील राकेश किशोर ने कहा, 16 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश की अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गयी थी.  मुख्य न्यायाधीश ने इसका मजाक उड़ाते हुए कहा, जाओ और मूर्ति से प्रार्थना करो और उसे अपना सिर वापस लगाने के लिए कहो. जब नूपुर शर्मा का मामला अदालत में आया, तो अदालत ने कहा कि उन्होंने माहौल बिगाड़ा है..

 

उन्होंने कहा,  हमारे सनातन धर्म से जुड़ा कोई मामला आता है, तो सर्वोच्च न्यायालय ऐसे आदेश देता है.  याचिकाकर्ता को राहत न दें, लेकिन उसका मजाक भी न उड़ाएं...मुझे चोट लगी थी.मैं नशे में नहीं था; यह उनकी हरकत पर मेरी प्रतिक्रिया थी...मैं डरा हुआ नहीं हूं. जो हुआ उसका मुझे कोई पछतावा नहीं है.  उन्होंने दावा किया कि सनातन धर्म के साथ SC भेदभाव करता है. 

 

 चीफ जस्टिस प्रकरण पर SC बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि भगवान विष्णु की मूर्ति वाले केस में सीजेआई  की टिप्पणी को गलत तरीके से मीडिया में पेश किया गया.  ऐसी बात फैलायी गया, जैसे CJI ने देवता का अपमान कर दिया है. आरोप लगाया कि  उन्होंने (वकील) ने प्रसिद्धि पाने के लिए ऐसा किया.  

 

 
जूता फेंकने वाले वकील को पुलिस ने कल सोमवार को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी. SC की ओर से शिकायत नहीं मिलने पर  पुलिस ने वकील को छोड़ दिया.  सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने आरोपी वकील राकेश किशोर कुमार का लाइसेंस रद्द कर दिया है.बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने आरोपी को तुरंत निलंबित कर दिया है.  

 

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