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अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून है आदिवासी स्वशासन की आत्मा : केशव महतो

Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने भाजपा नेता चंपाई सोरेन के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि पेसा कानून सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी स्वशासन की आत्मा है. 

 

जिन लोगों ने वर्षों तक शासन किया, उनके कार्यकाल में आदिवासियों की न तो जमीन सुरक्षित रही, न जंगल और न ही अधिकार. आज वही लोग पेसा को लेकर भ्रम फैलाकर आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं.

 

प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही, जनता, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से राय लेकर इसे अंतिम रूप दिया गया है.

 

भाजपा की राजनीति “नाच न जाने आंगन टेढ़ा” जैसी- सुखदेव भगत

सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि भाजपा की राजनीति “नाच न जाने आंगन टेढ़ा” जैसी है. बिना पेसा को ठीक से पढ़े और समझे, भाजपा नेता धार्मिक और भ्रामक बातें फैलाकर आदिवासी समाज को आपस में लड़वाना चाहते हैं.

 

यह वह लोग हैं जो आदिवासी को वनवासी कहते हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में लाखों एकड़ आदिवासी जमीन लैंड बैंक में डालकर पूंजीपतियों को सौंपने की साजिश रची गई.

 

सरना धर्म कोड के मुद्दे पर भाजपा क्यों मौन है

सुखदेव भगत ने सवाल उठाया कि सरना धर्म कोड के मुद्दे पर भाजपा क्यों मौन है, जबकि गठबंधन सरकार ने इसे विधानसभा से पारित कर केंद्र को भेज दिया है, इससे स्पष्ट है कि भाजपा को आदिवासियों के धर्म, संस्कृति और पहचान से कोई सरोकार नहीं है.

 

उन्होंने कहा कि पेसा कानून से महात्मा गांधी के गांवों को मजबूत करने के सपने को मजबूती मिली है. विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी ने कहा कि भाजपा ने अपने शासनकाल में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया था और लैंड बैंक के माध्यम से आदिवासियों की जमीन छीनने की नीति अपनाई.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नजर झारखंड की जमीन, जंगल और खनिज संपदा पर है, न कि आदिवासियों के हितों पर. भाजपा की साजिशों को आदिवासी समाज कभी सफल नहीं होने देगा.

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