Ranchi : प्रकृति पर्व सरहुल शोभायात्रा 59वें साल में प्रवेश करेगा, जो 1967 में शुरू हुई. इस शोभायात्रा में 100 लोग शामिल थे. बाबा कार्तिक उरांव, डॉ रामदयाल मुंडा समेत अन्य लोगों ने मुख्य भूमिका निभाई थी. हातमा सरना स्थल से शुरू हुई थी, जो रेडियम रोड, फिरायालाल, जयपाल सिंह मुंडा चौक होते हुए सिरमटोली सरना स्थल पहुंची थी, यहां पर विधिवत तरीके से पूजा पाठ के बाद समापन किया गया.
अब यह सरहुल शोभायात्रा एक व्यापक रूप ले चुका है. जहां लाखों की संख्या में सरना धर्मावलंबी शामिल होते है. आज सरहुल शोभायात्रा के स्वागत के लिए सैकडों सामाजिक बुद्धिजीवी लोग सरहुल शोभायात्रा का स्वागत करते है. आज (शुक्रवार) शाम में 7.30 बजे हातमा तालाब से पानी लाकर दो घड़ो में पानी भरेंगे.
सरना धर्मावलंबी आज दिन भर उपवास में रहे. इसके साथ ही नदी तालाबों से मछली केकड़ा भी पकड़े गए. 21 मार्च सुबह 8 बजे बारिश होने की सूचना दी जायेगी. पांच मुर्गों की बली दी जाएगी. इस दौरान मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने बताया कि 21 मार्च को पूर्व सीएम चंपाई सोरेन शामिल होंगे.
हातमा सरना स्थल पर पूर्व सीएम चंपाई सोरेन व सिरमटोली सरना स्थल पर सीएम होंगे शामिल
विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पहुंचकर सरहुल शोभायात्रा में शामिल होने के लिए न्योता दिया गया है. पूजा की तैयारियों, इसकी पारंपरिक महत्ता और आयोजन को भव्य एवं सांस्कृतिक स्वरूप में संपन्न कराने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई.
केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने बताया कि सरहुल आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व है, जिसे प्रकृति पूजा और परंपराओं के साथ मनाया जाता है.
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