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स्पेशल ब्रांच ने JPSC में गड़बड़ी की दो बार दी थी रिपोर्ट! CM के संज्ञान के बाद CID की कार्रवाई से खुलने लगे राज

Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए सवाल सामने आ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, Special Branch ने JPSC में कथित अनियमितताओं को लेकर दो बार रिपोर्ट तैयार की थी. पहली रिपोर्ट फरवरी 2026 में और दूसरी रिपोर्ट जुलाई 2026 में भेजे जाने की बात सामने आ रही है.
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झारखंड की खबरें

Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए सवाल सामने आ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, Special Branch ने JPSC में कथित अनियमितताओं को लेकर दो बार रिपोर्ट तैयार की थी. पहली रिपोर्ट फरवरी 2026 में और दूसरी रिपोर्ट जुलाई 2026 में भेजे जाने की बात सामने आ रही है.

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बताया जा रहा है कि जुलाई में Special Branch की रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री स्तर पर मामले का संज्ञान लिया गया. इसके बाद CID ने पूरे मामले में कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर जांच शुरू की. जांच आगे बढ़ने के बाद JPSC कार्यालय समेत परीक्षा से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की गई.


CID की कार्रवाई में JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी, TDPL कंपनी के निदेशक राजवीर सिंह समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया था. पूछताछ और जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. गिरफ्तार मनोज तिवारी उर्फ अभय तिवारी के घर से 5 लाख  कैश बरामद हुआ था.


जांच के दौरान श्वेता गुप्ता और TDPL कंपनी के निदेशक राजवीर सिंह से जुड़े ठिकानों पर भी छापेमारी की गई. CID ने वहां से कथित तौर पर हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, डायरी और परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं. इन दस्तावेजों में अभ्यर्थियों से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य कागजात भी शामिल बताए जा रहे हैं.


पूछताछ में अलग-अलग बयान, 17 से अधिक लोगों के नाम सामने आने का दावा

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने अलग-अलग बयान दिए हैं. जांच एजेंसी को कथित तौर पर 17 से अधिक लोगों के नाम बताए गए हैं. अब CID इन सभी नामों और उनकी भूमिका की जांच कर रही है.


जांच के दौरान यह भी सामने आने की बात कही जा रही है कि अभय तिवारी और श्वेता गुप्ता के माध्यम से 8,10 से अधिक लोगों को JPSC की मेन्स परीक्षा और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में नौकरी दिलाने का कथित नेटवर्क चलाया गया. हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी.


कहां तक फैला है नेटवर्क? CID कर रही जांच

JPSC परीक्षा विवाद में अब जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. CID यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितता केवल 14वीं सिविल सेवा परीक्षा तक सीमित थी या फिर परीक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य मामलों में भी इसका प्रभाव था.


जांच एजेंसी बरामद डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों, डायरी और अन्य रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच करा रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों से पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

 

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