Lagatar desk : मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. केंद्र सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को फिल्म का टीजर और सभी प्रमोशनल कंटेंट हटाने का आदेश दिया, जिसे नेटफ्लिक्स ने तुरंत हटा दिया.
विवाद की शुरुआत
‘घूसखोर पंडत’ का टीजर 3 फरवरी को लॉन्च किया गया था. इसमें मनोज बाजपेयी ने अजय दीक्षित नाम के भ्रष्ट पुलिस अफसर का रोल निभाया है.टीजर आने के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म के बायकॉट की मांग शुरू हो गई. मेकर्स पर आरोप लगाया गया कि फिल्म का टाइटल ब्राह्मण समुदाय का अपमान करता है और जातिवाद फैलाने की कोशिश करता है.
कानूनी कार्रवाई और एफआईआर
सोशल मीडिया विवाद और लीगल नोटिस के बाद यूपी के हजरतगंज थाने में फिल्म के डायरेक्टर और टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई. केंद्रीय निर्देश पर नेटफ्लिक्स को सभी प्रमोशनल कंटेंट हटाने का आदेश भी दिया गया.
बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने एक्स पर लिखा -केंद्र के त्वरित और प्रभावी निर्णय का हार्दिक अभिनंदन. ‘घूसखोर पंडत’ जैसे अपमानजनक कंटेंट को हटवाया गया है और FIR भी दर्ज की गई. सनातन धर्म का अपमान अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
ब्राह्मण समाज के विरोध ने सियासी रूप ले लिया. भोपाल में सड़कों पर प्रदर्शन हुए और मेकर्स के खिलाफ नारेबाजी की गई. ब्रज के संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर फिल्म पर बैन की मांग की. मेरठ में भी फिल्म को लेकर बवाल हुआ और लीगल नोटिस भेजा गया.
मेकर्स और कलाकारों की सफाई
फिल्म के राइटर-प्रोड्यूसर नीरज पांडे ने कहा कि यह फिल्म किसी समुदाय विशेष पर आधारित नहीं है और सभी से पहले फिल्म देखने की अपील की. मनोज बाजपेयी ने भी सफाई पेश की, लेकिन विवाद अभी भी ठंडा नहीं हुआ.
फिल्म के बारे में
‘घूसखोर पंडत’ का निर्देशन रितेश शाह ने किया है. फिल्म में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं और इसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया जाना था. विवाद के बीच केंद्र सरकार ने कार्रवाई करते हुए फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट को हटवाया और FIR दर्ज कराई.
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