Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

आदिवासी छात्र संघ ने राज्यपाल को उच्च शिक्षा से संबंधित पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा

झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था में कथित अव्यवस्था, जनजातीय भाषाओं की उपेक्षा और विश्वविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर आदिवासी छात्र संघ (DSPMU) ने शनिवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा.
Advertisement
Advertisement
  • उच्च शिक्षा और जनजातीय अस्मिता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

Ranchi : झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था में कथित अव्यवस्था, जनजातीय भाषाओं की उपेक्षा और विश्वविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर आदिवासी छात्र संघ (DSPMU) ने शनिवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा.

 

संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने लोकभवन में राज्यपाल से मुलाकात कर उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा. प्रतिनिधिमंडल में सीमा मुर्मू और ओम प्रकाश उरांव भी शामिल रहे. 

 

ज्ञापन में कहा गया कि झारखंड के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र-छात्राएं बुनियादी सुविधाओं और नियमित पठन-पाठन से वंचित हैं. उच्च शिक्षा व्यवस्था शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक चुनौतियों से प्रभावित है.

 

छात्र संघ ने मांग की कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में उरांव/कुड़ुख, मुंडारी, हो, संथाली और खड़िया भाषाओं के स्नातक और स्नातकोत्तर विभाग स्थापित किए जाएं. साथ ही विभागों के लिए आधुनिक भवन, पुस्तकालय, संग्रहालय और पारंपरिक धुमकुड़िया जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. 

 

संघ ने जनजातीय भाषाओं की लिपियों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की भी मांग उठाई. इसमें कुड़ुख के लिए तोलोंग सिकी, संथाली के लिए ओल चिकी तथा अन्य भाषाओं की मानक लिपियों को अनिवार्य अध्ययन में शामिल करने और इनके संरक्षण व शोध के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई.

 

प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव जल्द कराने की मांग करते हुए इसे लोकतांत्रिक भागीदारी से जोड़ा. साथ ही शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने तक आवश्यकता आधारित गेस्ट फैकल्टी नियुक्त करने की मांग रखी ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों.

 

ज्ञापन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) के खेल विभाग से जुड़े कुछ आरोपों का भी उल्लेख किया गया. छात्र संघ ने खेल शिक्षक पर कथित अवैध वसूली, अभद्र व्यवहार और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसे आरोपों की जांच तथा उचित कार्रवाई की मांग की.

 

राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को सुनने के बाद मामलों को गंभीर बताते हुए संबंधित मुद्दों पर संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने का आश्वासन दिया. छात्र संघ ने उम्मीद जताई कि इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जनजातीय भाषाओं व संस्कृति के संरक्षण को मजबूती मिलेगी.

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही