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झारखंड बनाने वालों की आवाज दबाई जा रही, सरकार को जवाब देना ही होगा :  पुष्कर महतो

मुख्यमंत्री आवास घेरने निकले झारखंड आंदोलनकारी अपनी विभिन्न मांगों पर अड़े हुए हैं. 17 आंदोलनकारी अनशन पर बैठ गए हैं. उनका आरोप है कि सरकार और प्रशासन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं.
 

Ranchi :  मुख्यमंत्री आवास घेरने निकले झारखंड आंदोलनकारी अपनी विभिन्न मांगों पर अड़े हुए हैं. 17 आंदोलनकारी अनशन पर बैठ गए हैं. उनका आरोप है कि सरकार और प्रशासन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं.  

 

इस दौरान झारखंड आंदोलनकारी नेता पुष्कर महतो ने सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा. पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए रांची पहुंचे हैं.  लेकिन पुलिस और प्रशासन ने कई स्थानों पर उन्हें रोक दिया.

 

उनका आरोप है कि कई आंदोलनकारियों को हिरासत में भी लिया गया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है.  कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों को हिरासत में लेना गैरकानूनी है.  ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. झारखंड आंदोलनकारी नेता ने हाईकोर्ट से मामले पर संज्ञान लेने की मांग की.

 

आंदोलनकारी नेता ने कहा कि झारखंड राज्य के गठन के लिए आंदोलनकारियों ने लंबा संघर्ष किया, जेल गए, लाठियां खाईं और कई लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी. इसके बावजूद आज उन्हीं आंदोलनकारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है और अपनी मांगों को खुलकर रखने का अवसर तक नहीं दिया जा रहा.

 

पुष्कर महतो ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलनकारियों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने में लगी हुई है. उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के संघर्ष की बदौलत बना है. आज हमारी बात सुनने के बजाय हमें रोका जा रहा है.

 

यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में सत्ता में बैठे लोगों को इसका राजनीतिक और सामाजिक परिणाम भुगतना पड़ेगा. उन्होंने बताया कि आंदोलन के समर्थन में 17 आंदोलनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

 

आंदोलनकारी नेता ने चेतावनी दी कि भूख हड़ताल पर बैठे किसी भी आंदोलनकारी की तबीयत बिगड़ने या किसी तरह की अनहोनी होने की स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी.

 

आंदोलनकारियों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों के संघर्ष के कारण आज झारखंड अस्तित्व में है, उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. 

 

 

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