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विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष आलमगीर आलम नियुक्ति घोटाले के बदले मनी लाउंड्रिंग में जेल गये

Ranchi : विधानसभा नियुक्ति घोटाले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका में तत्कालीन अध्यक्ष आलमगीर आलम को प्रतिवादी बनाया गया था. जिस वक्त यह याचिका दायर की गयी थी उस वक्त आलमगीर आलम राज्य में ग्रामीण विकास मंत्री थे. याचिका में उनकी संपत्ति की भी जांच करने की मांग की गयी थी.
 

Ranchi : विधानसभा नियुक्ति घोटाले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका में तत्कालीन अध्यक्ष आलमगीर आलम को प्रतिवादी बनाया गया था. जिस वक्त यह याचिका दायर की गयी थी उस वक्त आलमगीर आलम राज्य में ग्रामीण विकास मंत्री थे. याचिका में उनकी संपत्ति की भी जांच करने की मांग की गयी थी.

 

याचिका पर सुनवाई के बाद झारखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायाधीश अरुण कुमार राय की पीठ ने फैसला सुनाया. न्यायालय ने विधानसभा में नियुक्तियों के दौरान हुई गड़बड़ी की सीबीआई जांच का आदेश दिया. हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में सीबीआई ने PE दर्ज कर मामले की जांच शुरू की. इस बीच विधानसभा ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की. विधानसभा द्वारा दायर अपील की सुनवाई न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश केवी विश्वनाथन की पीठ में हुई. इसमें विधानसभा की ओर से कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश की. न्यायालय ने सुनवाई के बाद विधासभा की याचिका स्वीकार कर ली. साथ ही अगले आदेश तक सीबीआई जांच पर रोक लगा दी.

 

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 नवंबर को दिये गये आदेश के आलोक में सीबीआई द्वारा दर्ज PE02(A)/2024-R में प्रारंभिक जांच बंद हो गयी. इससे विधानसभा नियुक्ति घोटाले में तत्कालीन अध्यक्ष आलमगीर आलम के मामले की भी जांच नहीं हुई. लेकिन उन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ग्रामीण विकास विभाग में जारी कमीशन घोटाले से हुई कमाई के पैसों की लॉन्ड्रिंग करने के आरोप में जेल जाना पड़ा.

 

प्रवर्तिन निदेशालय ने जमशेदपुर निगरानी थाने में दर्ज 10 हजार रुपये की घूसखोरी के मामले को ECIR के रूप में दर्ज किया और मामले की जांच शुरू की. ईडी ने जांच के पहले चरण में ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के ठिकानों पर छापा मारा. जांच के दौरान वीरेंद्र राम ने यह स्वीकार किया कि ग्रामीण विकास की योजनाओं में टेंड की राशि का 1.5% कमीशन मंत्री के लिए वसूली जाती है.

 

वीरेंद्र ने मंत्री को तीन करोड़ रुपये देने की भी बात स्वीकार की. इसके करीब एक साल बाद ईडी ने आलमगीर आलम के आप्त सचिव संजीव लाल व उसके करीबी जहांगीर आलम सहित अन्य के ठिकानों पर छापा मारा. छह मई 2024 को हुई इस छापामारी के दौरान संजीव लाल के करीबी जहांगीर आलम के फ्लैट से 32.20 करोड़ रुपये नकद जब्त किया.

 

संजीव लाल के कंप्यूटर से मिले डाटा, पूछताछ और जहांगीर के ठिकानों से मिली भारी नकदी के बाद इडी ने तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया. पूछताछ में संजीव लाल, जहांगीर आलम और तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम द्वारा दी गयी जानकारियों के मामले में संतोषप्रद जवाब नहीं मिलने पर ईडी ने 15 मई 2024 को तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को गिरफ़्तार कर लिया. उसके बाद से वह मनी लाउंड्रिंग के आरोप में जेल में हैं.

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