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छोटे अपराध में वर्षों से बंद कैदियों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की जरूरत : बंधु तिर्की

Ranchi : पूर्व मंत्री, समन्वय समिति के सदस्य एवं झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा है कि विचाराधीन और छोटे अपराध में जेल में बंद कैदियों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की जरूरत है. कहा है कि बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार सहित प्रदेश के सभी जेलों में आदिवासियों, अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों सहित सभी वर्गों के कई वैसे कैदी न्याय की आस में बंद हैं, जिनका मामला लंबे समय से न्यायालय में सुनवाई के लिए विचाराधीन अथवा लंबित है. वैसे मामलों की संख्या भी अच्छी-खासी है, जहां मामूली अपराधों के लिए उन्हें जेल में रहते हुए लंबा समय बीत गया, पर आर्थिक या अन्य कारणों से संबंधित अदालतों की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से पूरा नहीं कर पाए और अबतक जेल में बंद हैं. इन कैदियों की रिहाई पर सरकार को विचार करना चाहिए. इसे भी पढ़ें पलामू">https://lagatar.in/action-on-illegal-mining-in-palamu-58-firs-in-two-years-20-crushers-demolished-1-crore-38-lakh-fine-recovered/">पलामू

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संवेदना एवं मानवता के आधार पर पहल करें

बंधु तिर्की ने कहा कि अपने क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश से उन्हें वैसी जानकारी और सूचनाएं मिलती हैं, जो दिल को झकझोर देती है. संवेदना एवं मानवता के आधार पर वैसे मामलों को गंभीरता से देखने की जरूरत है. उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय, झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार के विधि विभाग के सक्षम अधिकारियों से इस मामले पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यदि इस दिशा में सार्थक और सकारात्मक कदम बढ़ते हैं, तो न केवल सभी को बिना पक्षपात के शीघ्र न्याय देने का भारतीय संविधान का उद्देश्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी, बल्कि अनेक दृष्टि से कमजोर उन साधनहीन कैदियों की दुआ-प्रार्थना भी मिलेगी.

तकनीकी कारणों से ही जेल में बंद हैं कई

पूर्व मंत्री ने कहा कि वर्षों एवं महीनों से विचाराधीन उन कैदियों के मामले भी बेचैन करनेवाले हैं, जहां छोटे-छोटे लड़ाई-झगड़े, मारपीट जैसे मामलों में गिरफ्तार विचाराधीन कैदी जेल में हैं. वे केवल अदालत की प्रक्रिया को पूरा न करने जैसे तकनीकी कारणों से ही जेल में बंद हैं. इसके अलावा अनेक मामले वैसे भी हैं, जहां केवल कुछ पैसे के अभाव में उनके परिवार के सदस्य अदालती प्रक्रिया से बचते हैं. क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता है कि यदि अदालती कार्रवाई में उनके पास की थोड़ी-बहुत धन-संपत्ति भी चली जायेगी तो वे अपना जीवन कैसे गुजारेंगे.

विधिसम्मत कार्रवाई की अपील

बंधु तिर्की ने कहा कि न्याय की आस में जेल में बंद अनेक विचाराधीन कैदियों के मामले दिलचस्प एवं संवेदना से भरे हैं. यदि उन मामलों में उन्हें सजा भी सुनाई जाती है तो वह छोटी अवधि की होगी और उससे कई गुना अधिक सजा वह पहले ही काट चुके होते हैं. वैसे कैदियों और उनके परिवार की परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. तिर्की ने कहा कि इस संदर्भ में वे झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से सकारात्मक दिशा में प्रयास की अपेक्षा के साथ ही राज्य सरकार और विशेष रूप से विधि विभाग के अधिकारियों से विधिसम्मत कार्रवाई की अपील के साथ एक विस्तृत प्रतिवेदन बनाकर राज्य सरकार के साथ ही न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की अपेक्षा रखते हैं.

आपसी सौहार्द्र - सहमति के साथ रहने की अपील

बंधु तिर्की ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन सरकार के 3 साल सफलता के साथ पूरे हो चुके हैं. अब आम जन की सरकार चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. सभी से विवादों से दूर रहकर आपसी सौहार्द्र - सहमति के साथ रहने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि नये साल में दृढ़ संकल्प लेने की जरूरत है. इसे भी पढ़ें – लोहरदगाः">https://lagatar.in/lohardaga-criminals-shot-exorcist-old-man-referred-to-rims/">लोहरदगाः

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