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मंदिरों में संगीत, व्यायाम और गौसेवा परंपरा को जीवंत करने की जरूरत- अरुण

Ranchi: विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर की ओर से बुधवार को सेवा सदन के समीप माहेश्वरी धर्मशाला में आयोजित अर्चक-पुरोहित गोष्ठी में मंदिरों की सामाजिक भूमिका को लेकर जोरदार चर्चा हुई. कार्यक्रम में शहर के विभिन्न मंदिरों के अर्चक, पुरोहित, पुजारी और ट्रस्टियों ने भाग लिया.


गोष्ठी को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय मंदिर एवं अर्चक-पुरोहित संपर्क प्रमुख अरुण नेटके ने कहा कि इतिहास में सनातन संस्कृति को कमजोर करने के लिए मंदिरों को निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि 1528 से श्रीराम जन्मभूमि को लेकर लंबे संघर्ष और पीढ़ियों के बलिदान के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सनातन आस्था की बड़ी जीत है. उन्होंने दावा किया कि एक वर्ष के भीतर करीब 23 करोड़ श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं.


नेटके ने कहा कि प्राचीन समय में मंदिर केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति के केंद्र होते थे. पुजारियों को आयुर्वेद का ज्ञान होता था और श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में औषधीय सामग्री दी जाती थी. उन्होंने चरणामृत को धार्मिक परंपरा के साथ औषधीय महत्व से भी जोड़ा.

 


उन्होंने विदेशी खान-पान को बीमारियों की वजह बताते हुए स्वदेशी भोजन अपनाने की अपील की. साथ ही मंदिरों में संगीत, व्यायाम और गौसेवा जैसी परंपराओं को फिर से मजबूत करने पर जोर दिया. कार्यक्रम में कई प्रांतीय व महानगर पदाधिकारी मौजूद रहे.

 

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