Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि मनरेगा के प्रारूप में किए गए बदलावों को समझने के लिए ज्यां द्रेज से मिलने के बजाए ईमानदार अधिकारियों के साथ बैठक करनी चाहिए. यह जानना चाहिए कि कैसे मोदी सरकार ने इस योजना को भ्रष्ट अधिकारियों, बिचौलियों और दलालों के “पंजे” से मुक्त कर विकसित भारत की एक नई रूपरेखा तैयार की है. बाबूलाल ने जी राम जी योजना पर कांग्रेस झामुमो के विरोध को हास्यास्पद बताया.
जेएमएम-कांग्रेस सरकार ने नैतिकता की सारी सीमाएं लांघ दी हैं
मरांडी ने कहा कि मनरेगा के नाम पर ढोंग और दिखावे की राजनीति करने वाली जेएमएम-कांग्रेस सरकार ने नैतिकता की सारी सीमाएं लांघ दी हैं. पूरे देश में सबसे बड़े मनरेगा घोटालों में आरोपित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को दो वर्षों से ज्यादा जेल में रहने के बाद बेल पर रिहा कराए जाने के तुरंत बाद एक बार फिर महत्त्वपूर्ण पद पर बैठा देना भ्रष्टाचार के प्रति वास्तविक नीयत को उजागर करता है.
वंचित वर्ग के लिए बढ़े रोजगार के दिन भी इन्हें रास नहीं आए
जब मोदी सरकार द्वारा योजना को पारदर्शी बनाने के लिए लाए गए सुधार अड़चन बने तो इन्होंने नाम का बहाना लेकर रोना शुरू कर दिया. वंचित वर्ग के लिए बढ़े रोजगार के दिन भी इन्हें रास नहीं आए. सार्वजनिक मंचों पर यही हेमंत सरकार मनरेगा की दुहाई देती है, लेकिन पर्दे के पीछे उसी योजना को खोखला करने वाले अधिकारियों को “जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी-उतना महत्वपूर्ण अधिकारी” मानकर पुरस्कृत करती है. मनरेगा जैसी गरीबों के रोजगार और अधिकार से जुड़ी योजना को लूटने वालों के साथ यह सहानुभूति केवल सत्ता संरक्षण का परिणाम है.
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