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झारखंड में साल 2024 के मुकाबले 2025 में नक्सली वारदातों में भारी गिरावट

Ranchi: झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की जीरो टॉलरेंस नीति का बड़ा असर देखने को मिल रहा है. राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों के साझा अभियान के कारण नक्सली घटनाओं में न केवल कमी आई है, बल्कि उनका प्रभाव क्षेत्र भी सिमटता जा रहा है. 


साल 2024 की तुलना में 2025 में नक्सल मामलों से संबंधित दर्ज केसों की संख्या में 5.4 प्रतिशत की गिरावट आई है. 2025 की शुरुआत जनवरी में 28 मामलों के साथ उग्रता देखी गई थी, लेकिन साल के अंत तक आते-आते नवंबर में यह आंकड़ा महज आठ पर सिमट गया. साल 2024 के जून के महीने में 29 मामलों के साथ नक्सली सबसे अधिक सक्रिय थे, जबकि पूरे साल औसतन 16-17 मामले प्रति माह दर्ज किए जा रहे थे.

 

साल 2025 में नक्सल मामले से संबंधित केस 

 

- जनवरी: 28
- फरवरी: 11
- मार्च: 21
- अप्रैल: 20
- मई: 25
- जून: 19
- जुलाई: 20
- अगस्त: 14
- सितंबर: 13
- अक्टूबर: 11
- नवंबर: 08
- कुल: 190

 

साल 2024 में नक्सल मामले से संबंधित केस 

 

- जनवरी: 23
- फरवरी: 25
- मार्च: 18
- अप्रैल: 20
- मई: 18
- जून: 29
- जुलाई: 09
- अगस्त: 22
- सितंबर: 08
- अक्टूबर: 16
- नवंबर: 13
- कुल: 201

 

एक साल में 7.64 करोड़ इनामी समेत 45 नक्सली ढेर 


बीते एक साल में झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में 45 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें 24 नक्सलियों पर 7.64 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. ये मुठभेड़ लातेहार, चाईबासा, बोकारो, हजारीबाग, पलामू और गुमला जिलों में हुई. 


केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम, गिरिडीह, गुमला, लातेहार और लोहरदगा झारखंड के मुख्य माओवादी प्रभावित जिले हैं. इनमें से गिरिडीह, गुमला, लातेहार और लोहरदगा को डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न की सूची में रखा गया है, जहां सुरक्षा बलों का विशेष ध्यान है.

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