Ranchi: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है. राज्य में वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का पांच वर्षीय कार्यकाल अप्रैल-मई 2027 में समाप्त होने जा रहा है. इसे ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी से ही अपने स्तर पर प्रशासनिक और चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है.
भले ही राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की आधिकारिक तिथियों की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन गांवों में चुनावी चौपालें सजने लगी हैं. इस त्रिस्तरीय चुनाव के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जिला परिषद सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और वार्ड सदस्य के पदों पर मतदान होना है. इसे देखते हुए पूर्व और वर्तमान प्रतिनिधियों के साथ-साथ नए दावेदार भी मैदान में उतर चुके हैं.
चुनावी समर को देखते हुए संभावित उम्मीदवारों ने ग्रामीण मतदाताओं को रिझाना शुरू कर दिया है. क्षेत्र में पकड़ मजबूत करने के लिए नेताओं के दौरे तेज हो गए हैं. वर्तमान और पूर्व मुखिया, जिला परिषद सदस्य तथा वार्ड सदस्य जनता के बीच लगातार उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं.
मौजूदा प्रतिनिधि अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों और योजनाओं का ब्योरा जनता के सामने रख रहे हैं. नए उम्मीदवार स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक विफलताओं और जनसमस्याओं को मुद्दा बनाकर जनता से बदलाव के लिए समर्थन मांग रहे हैं.
जैसे-जैसे समय नजदीक आ रहा है, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्थानीय रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर चर्चाएं गर्म हो रही हैं. कुल मिलाकर, झारखंड के गांवों में चुनावी बिगुल फूंकने से पहले ही शह और मात का खेल शुरू हो चुका है, जिसने ग्रामीण राजनीति के पारे को बढ़ा दिया है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


Leave a Comment