Ranchi: कोयला ढुलाई में 7 माह में सीसीएल द्वारा वसूले गए टोल टैक्स की वापसी को लेकर दाखिल विनायक सपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की याचिका की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट में हुई. मामले में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि कोयला ढुलाई को लेकर सीसीएल द्वारा वसूले गए टोल टैक्स की राशि, जो सरकार के पास जमा कराई गई थी, उसे सीसीएल को वापस करना होगा.
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कोर्ट ने कहा की सरकार शपथ पत्र दाखिल कर बताएं कि यह राशि कब तक सीसीएल को वापस कर दी जाएगी. इस पर सरकार का पक्ष रख रहे अधिवक्ता ने कहा कि वह सरकार से इंस्ट्रक्शन लेकर बताएंगे कि यह राशि कितने दिनों में वापस होगी. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त निर्धारित की.
वहीं कोर्ट ने सीसीएल को भी निर्देश दिया है कि टोल टैक्स की राशि सरकार से प्राप्त होने के बाद वह प्रार्थी को वापस करें. मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा.
दरअसल, राज्य सरकार के टोल टैक्स रूल 2021 के तहत सीसीएल ने कोयला ढुलाई करने वालों से टोल टैक्स की वसूली की थी. टोल टैक्स की राशि 7 महीने यानी 26 अक्टूबर 2021 से 15 अप्रैल 2022 तक 60 रुपये प्रति टन सीसीएल द्वारा कोयला ढुलाई करने वालों से वसूली गई थी.
सुनवाई के दौरान के दौरान सीसीएल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि टोल टैक्स की राशि उसने राज्य सरकार के पास जमा करा दी थी. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने एक मामले में राज्य सरकार के टोल टैक्स को अवैध करार दिया था, इसके खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी, जिसे बाद में राज्य सरकार ने वापस ले लिया था. ऐसे में कोयला ढुलाई को लेकर प्रार्थी से 7 माह वसूले गए टोल टैक्स की राशि की उसे वापस होनी चाहिए.
कोर्ट ने सीसीएल से कहा कि वह बताएं कि यह टोल टैक्स के मद में ली गई राशि प्रार्थी को कब मुहैया कराएंगे. कोर्ट ने राज्य सरकार से भी कहा कि वह सीसीएल द्वारा प्रार्थी के टोल टैक्स की वसूली गई राशि सीसीएल को वापस कर दें.
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