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प्रकृति से जुड़ी परंपरा ही हमारी पहचान, इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व  : CM हेमंत

सीएम ने कहा कि आदिवासी समाज की यह परंपरा प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन का संदेश देती है. प्रकृति को संजोना, संवारना और उसके साथ जुड़कर जीवन जीना ही हमारी संस्कृति का मूल है.  आगे कहा कि यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है और इसी के साथ जीवन की शुरुआत और अंत भी जुड़ा हुआ है.
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Ranchi :   प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सिरमटोली सरना स्थल पहुंचकर पूजा अर्चना की. इस मौके पर उन्होंने पाहन और मुंडा समाज को सरहुल की बधाई दी. उन्होंने कहा कि सरहुल सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध का प्रतीक है.

 


सीएम ने कहा कि आदिवासी समाज की यह परंपरा प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन का संदेश देती है. प्रकृति को संजोना, संवारना और उसके साथ जुड़कर जीवन जीना ही हमारी संस्कृति का मूल है.  आगे कहा कि यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है और इसी के साथ जीवन की शुरुआत और अंत भी जुड़ा हुआ है.

 

दुनिया में ऐसी अद्भुत और जीवंत परंपरा कहीं और देखने को नहीं मिलती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की व्यस्त जिंदगी में भी लोग अलग-अलग स्थानों से एकत्र होकर अपने पूर्वजों की परंपराओं को निभा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसे आने वाली पीढ़ी को सौंपना हमारा कर्तव्य है.

 

इससे पहले सुबह से ही सिरमटोली सरना स्थल पर सरना धर्मावलंबियों की भारी भीड़ उमड़ती रही. पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और नृत्य-गीतों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था. लोगों ने सखुआ पेड़ की पूजा कर प्रकृति के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की.

 

 

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