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रिम्स में गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, शोध गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर

Ranchi : रिम्स में गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस यानी जीसीपी पर एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को क्लिनिकल ट्रायल के अंतरराष्ट्रीय मानकों और नैतिक दिशा-निर्देशों की जानकारी देना है.

 

उद्घाटन सत्र में रिम्स निदेशक प्रो राज कुमार ने कहा कि गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस केवल एक गाइडलाइन नहीं बल्कि नैतिक शोध की आधारशिला है. इसके सही पालन से क्लिनिकल ट्रायल सुरक्षित, विश्वसनीय और वैश्विक मानकों के अनुरूप होते हैं. उन्होंने कहा कि रिम्स शोध की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है.

 

 

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि जीसीपी मानव प्रतिभागियों से जुड़े क्लिनिकल ट्रायल के डिजाइन, संचालन, रिकॉर्डिंग और रिपोर्टिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानक है. इसके पालन से शोध की विश्वसनीयता और प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है.

 

रिम्स ने पिछले तीन वर्षों में शोध के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं. इस दौरान 77 शोध लेख प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं. 46 शोध पत्र संपादकीय समीक्षा में हैं और 64 शोध पत्र प्रकाशन के लिए तैयार हैं. संस्थान में 17 फंडेड और 32 सेल्फ फंडेड शोध परियोजनाएं चल रही हैं. 27 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है. इसके अलावा 18 प्रस्ताव समीक्षा में हैं और 26 प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं.

 

संस्थान ने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में भी प्रगति की है. अब तक 11 पेटेंट प्रकाशित हो चुके हैं या प्रक्रिया में हैं. रिम्स प्रबंधन का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से शोध को और मजबूत बनाया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान की पहचान बढ़ेगी.

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