Ranchi : झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के करियर डेवलेपमेंट सेल ने एक दिवसीय ‘ट्रांजिशन: कैंपस टू कॉरपोरेट सिम्पोजियम’ का आयोजन किया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कॉरपोरेट दुनिया के रुझानों और जॉब मार्केट की जरूरतों के बारे में जागरूक करना था.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नैक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो केबी पंडा ने विश्वविद्यालय के नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) के तहत चल रहे कार्यक्रमों और प्लेसमेंट संबंधित पहल के बारे में जानकारी दी.
मुख्य वक्ता प्रो रमन बल्लभ जो इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डेवलेपमेंट (आईएसटीडी) के राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य हैं ने विद्यार्थियों को जॉब मार्केट की बदलती मांगों के बारे में बताया.
उन्होंने कहा नौकरी पाने के लिए जरूरी स्किल्स पर ध्यान देना बेहद महत्वपूर्ण है. साथ ही करियर की सीढ़ी पर सफलता पाने के लिए विद्यार्थियों को अभी से तैयार होना चाहिए.
कार्यक्रम में विभिन्न प्रमुख कॉरपोरेट कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. इनमें टाटा स्टील, सीसीएल, सीएमपीडीआई, गर्ग इंजीनियरिंग जैसे बड़े नाम थे.
निधि कुमारी टाटा स्टील के टैलेंट एक्विजिशन मैनेजर जमशेदपुर ने विद्यार्थियों को बताया कि वे अपनी पढ़ाई के दौरान ही अपने कौशल को बाजार की जरूरतों के हिसाब से ढालें. उन्होंने यह भी साझा किया कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती और इसके लिए निरंतर मेहनत की आवश्यकता होती है.
कार्यक्रम का अहम हिस्सा पैनल डिस्कशन था जिसमें दस बड़े कॉरपोरेट संगठनों के अधिकारी विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए उनके सवालों का उत्तर देते रहे.
पैनल डिस्कशन में शामिल अधिकारियों में प्रमुख नाम
- प्रो. रमन बल्लभ (आईएसटीडी)
- एन के ओझा (पूर्व जनरल मैनेजर, कोल इंडिया लिमिटेड)
- डॉ. प्रभाष चंद्र मिश्रा (पूर्व कार्यकारी हेड, आईआईसीएम)
- श्रीमती रश्मि दयाल (पूर्व जनरल मैनेजर, सीसीएल)
- श्रीमती सुनीता मेहता (पूर्व जनरल मैनेजर, सीएमपीडीआई)
- मिथलेश कुमार उपाध्याय (प्रिंसिपल, एनटीपीसी)
- सुनील गर्ग (निदेशक, गर्ग इंजीनियर्स)
- सैकत घोष (निदेशक, मेसर्स जमशेदपुर स्प्रिंग एंड इंजीनियरिंग)
कुलपति प्रो क्षिति भूषण दास ने विश्वविद्यालय में उपस्थित सभी अधिकारियों का स्वागत करते हुए इंटर्नशिप कार्यक्रम और एमओयू के लिए विचार-विमर्श किया. उन्होंने सीयूजे के पिछले चार वर्षों के विकास की जानकारी दी और भविष्य में कॉरपोरेट संगठनों के साथ सहयोग की संभावना पर जोर दिया.
इस कार्यक्रम के संयोजन में सीयूजे और आईएसटीडी रांची चैप्टर का महत्वपूर्ण योगदान था. कार्यक्रम का संचालन प्रो डीबी लाटा ने किया और इसमें डॉ पीके परिदा, डॉ भास्कर सिंह, डॉ सुदर्शन यादव, डॉ नीतेश भाटिया, और डॉ सुमित कुमार ने भी सहयोग किया.
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