Ranchi: नगर निकाय चुनाव में मेयर पद की आदिवासी समाज के लिए आरक्षित सीट किया गया है. लोकतंत्र में आदिवासियों की निर्णायक भागीदारी भी इसे मजबूती प्रदान कर रहा है. मेयर पद के आरक्षित सीट होते ही राजनीतिक पार्टियों और आदिवासी संगठनों में हलचल तेज हो गई है.
राजनीतिक दलों द्वारा अपने-अपने प्रत्याशी उतारना सामान्य प्रक्रिया है. वहीं दूसरी ओर आदिवासी संगठनों ने पूर्व में कई बार राजनीतिक पार्टियों की नीतियों का विरोध भी दर्ज कराए गए है. इसके बावजूद इस बार नगर निकाय चुनाव में आदिवासी समाज और प्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिशें किए जा रहे हैं. आदिवासी संगठनों में आपसी एकजुटता पर भी बल दिया जा रहा है, ताकि आदिवासी मांगों को नजरअंदाज न किया जा सके.
आदिवासी संगठनों के बीच बिखराव को एक पुरानी समस्या है. कई सामाजिक कार्यकर्ता इसे पुनर्मिलन का अवसर बता रहे हैं. आदिवासी संगठन के प्रत्य़ाशी ने बताया कि विविधता ही आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत है. संयुक्त रणनीति है. साझा उम्मीदवार खड़ा किए जायेंगे.
मुद्दों पर सामूहिक अभियान चलाए जायेंगे. वहीं युवा आदिवासियों को नेतृत्व में आगे लाने की पहल भी किए जा रहे हैं. मेयर पद के लिए आरक्षित सीट होने के कारण राजनीतिक पार्टियां और आदिवासी संगठन आमने-सामने नजर आ रहे हैं.
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