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अस्तित्व व संस्कृति बचाने के लिए आदिवासी संगठनों को एकजुट होने की जरूरत- फूलचंद तिर्की

Ranchi : केंद्रीय सरना समिति ने संवाददाता सम्मेलन में आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व को लेकर चिंता जताई. वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज आज संक्रमण काल से गुजर रहा है और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. सम्मेलन में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की, वर्षा गाड़ी, प्रिया मुंडा, विजय मुंडा, चितरंजन उरांव, रमेश नगेशिया समेत अन्य लोग मौजूद थे.
 

Ranchi : केंद्रीय सरना समिति ने संवाददाता सम्मेलन में आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व को लेकर चिंता जताई. वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज आज संक्रमण काल से गुजर रहा है और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. सम्मेलन में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की, वर्षा गाड़ी, प्रिया मुंडा, विजय मुंडा, चितरंजन उरांव, रमेश नगेशिया समेत अन्य लोग मौजूद थे. 

 

बिरसा वाहिनी  की संस्थापक प्रिया मुंडा ने कहा कि आज गैर आदिवासी, एसटी महिलाओं से शादी तो की जा रही है, लेकिन उनकी पहचान और सरनेम खत्म नहीं हो रही है. इसकी वजह से आदिवासी महिलाएं आरक्षित सीट का लाभ उठा रही है.

 

उन्होंने कहा कि समाज को अपनी पहचान बचाने के लिए सजग रहने की जरूरत है. वहीं, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि सरना और सनातन एक नहीं हैं. आदिवासी समाज को वनवासी कहना भी गलत है. आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है और उसकी अपनी अलग परंपरा, संस्कृति और पूजा पद्धति है. वर्ष 2027 की जनगणना को लेकर समाज को जागरूक होने की जरूरत है.

 

आज सरना-ईसाई के नाम पर अलग-अलग स्लोगन दिए जा रहे है. जबकि आदिवासी समाज को अलग पहचान के साथ देखा जाना चाहिए. फूलचंद तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी जड़ों और परंपराओं को समझना होगा. इससे कभी भी दूर नहीं जाना चाहिए. जिस तरह कुर्मी आंदोलन में समाज एकजुट हुआ, उसी तरह आदिवासी संगठनों को भी संगठित होने की जरूरत है.

 

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के पास अलिखित ग्रंथ हैं और आदिवासी जल, जंगल और जमीन को पूजता है. पूरखों को याद करता है. इसलिए आज भी आदिवासी समाज पड़हा व्यवस्था को मानता है.

 

देशभर में करीब 800 जनजातियां हैं, जो अपने-अपने तरीके से पूर्वजों और प्रकृति की पूजा करती हैं. बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी संगठनों की लड़ाई अलग-अलग हो सकती है, लेकिन समाज और अस्तित्व बचाने का मुद्दा एक है.

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