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आदिवासी संगठनों ने राज्यपाल को राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा पर सौंपा ज्ञापन

Ranchi: वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित लोकसभा और झारखंड विधानसभा परिसीमन के दौरान अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक अधिकारों और आरक्षित सीटों के सुरक्षा की मांग की. गुरूवार को राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, भारत और आदिवासी छात्र संघ, झारखंड के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया. इस दौरान आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को किसी भी स्थिति में कम नहीं करने की मांग की है.


छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन आदिवासी समाज की विशेष पहचान, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से हुआ है. ऐसे में केवल 2011 की जनगणना के आधार पर अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटे हैं. लोकसभा और विधानसभा सीटों में कमी करना संविधान की मूल भावना और पांचवीं अनुसूची के उद्देश्यों के विपरीत होगा.


ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 244(1), 46, 330, 332 और 338ए, पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम-1996, छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) का उल्लेख करते हुए आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व को यथावत बनाए रखने की मांग की गई. 


प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे इस विषय पर भारत सरकार, भारत निर्वाचन आयोग और प्रस्तावित परिसीमन आयोग के समक्ष झारखंड के आदिवासी समाज की संवैधानिक चिंताओं और मांगों को प्रभावी ढंग से रखें.

 

प्रतिनिधिमंडल में राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, भारत के केंद्रीय महासचिव विद्यासागर केरकेट्टा, केंद्रीय प्रवक्ता संजय पाहन, प्रदेश अध्यक्ष रवि तिग्गा और आदिवासी छात्र संघ, झारखंड के अध्यक्ष सुशील उरांव, महासचिव प्रो. जलेश्वर भगत व रांची जिला अध्यक्ष मनोज उरांव शामिल थे.

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