Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

झारखंड में कृषि सभ्यता एवं संस्कृति का प्रतीक है टुसु पर्व: कुलसचिव

Ranchi : राजधानी रांची के  मोरहाबादी स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में एक दिवसीय ‘टुसु मिलन समारोह अखड़ा’ का आयोजन किया गया. जहां कार्यक्रम की शुरूआत टुसु स्वरूप चैड़ल का स्वागत एवं स्थापना पारंपरिक विधि-विधान से की गई. साथ ही इस मौके पर शोभायात्रा निकाली गई. जो कुड़मालि विभाग से शुरू होकर विश्वविद्यालय कैंपस से बाहर तक निकाली गई. 

 

टुसु पर्व भाषा, संस्कृति व सभ्यता की विशेष पहचान 

टुसु स्वरूप चैड़ल का अतिथियों ने पुष्पार्पण एवं चुमावन किया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. धनंजय वासुदेव द्विवेदी ने कहा- टुसु धान का स्वरूप है, जो कृषि से जुड़ा पर्व है, यह पर्व कृषि सभ्यता के विकास का प्रतीक है. वहीं, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुचि संतोष बरवार ने कहा- यह पर्व पढ़ाई के साथ हमें अपने संस्कृति से जुड़े रहने का अवसर देती है. हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जिंदर सिंह मुंडा ने कहा- टुसु पर्व झारखंड में 12 महीने में 13 पर्व है, जो यहां की भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता की विशेष पहचान है. 

Uploaded Image

टुसु मूलत: धान की खेती पर आधारित पर्व

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के समन्वयक सह खोरठा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बिनोद कुमार ने कहा कि टुसु पूरे कुड़मालि, खोरठा एवं पांचपरगना क्षेत्र की एक प्रमुख कृषि आधारित पर्व है. जो धान की कटाई के उपरांत पूस महीने के अंत में की जाती है. कुड़मालि विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ निताई चंद्र महतो ने कहा- टुसु मूलत: धान की खेती आधारित पर्व है. इसकी शुरूआत 6 महीने पूर्व जेठ महीने में धान की बीजा खेत में देने के साथ ही हो जाती है. अगहन में टुसु की स्थापना अपने घर में करते हैं. पूस महीने में इसकी आराधना एवं गीत गाकर टुसु को जगाते हैं. अंत में मकर के दिन टुसु को जलाशय में विसर्जित करते हैं. 

 

कार्यक्रम में ये हुए शामिल

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी डॉ. अनिता मेहता, बी.एड. के डॉ. पारितोष मांझी, सामाजशास्त्र विभाग के डॉ. तनुजा, डॉ.अजिता, डॉ. रीना जया, केमिस्ट्री के डॉ. रियाज हसन, कुड़ुख के डॉ. सीता कुमारी, सुनिता कुमारी, खड़िया के सुनिता केरकेटटा, संथाली के डॉ. डुमनि माई मुर्मू, मुंडारी के डॉ. शांति नाग व डॉ. दशमी ओड़ेया, अंग्रेजी के करमा कुमार, संस्कृत के डॉ. जगदंबा प्रसाद सिंह समेत अन्य शामिल थे।

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही