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CUJ के दो सहायक प्राध्यापकों को मिला ICSSR से 14 लाख का शोध अनुदान

Ranchi : सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे) के दो सहायक प्राध्यापकों को ICSSR की विशेष आमंत्रण योजना के तहत 14 लाख का शोध अनुदान प्राप्त हुआ है. यह अनुदान “भारत में परिवार और पारिवारिक व्यवस्था (2025-26)” विषय पर स्वीकृत किया गया है. इस शोध के अंतर्गत झारखंड में महिलाओं की स्थिति पर विस्तृत अध्ययन किया जाएगा.

 

ICSSR द्वारा स्वीकृत शोध परियोजना का शीर्षक “झारखंड के लोहरदगा में प्रवासी और गैर-प्रवासी परिवारों में महिलाओं की स्वायत्तता और निर्णय लेने की प्रक्रिया है. इस परियोजना के परियोजना अन्वेषक (Principal Investigator) डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह और सह-परियोजना अन्वेषक (Co-Principal Investigator) डॉ. तनुश्री कुंडू हैं.

 

परियोजना के चयन पर खुशी व्यक्त करते हुए डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह शोध अपने स्पष्ट विचार, सशक्त अनुसंधान डिजाइन और सार्वजनिक नीति के लिए इसकी उपयोगिता के कारण पुरस्कृत हुआ है. 

 

उन्होंने कहा कि यह अध्ययन विशेष रूप से लोहरदगा जिले में प्रवासी और गैर-प्रवासी परिवारों में महिलाओं की भूमिका और निर्णय लेने की शक्ति पर केंद्रित है. शोध में यह विश्लेषण किया जाएगा कि पुरुषों के काम के लिए पलायन, पारिवारिक संरचना (एकल या संयुक्त परिवार), आजीविका के विभिन्न साधन और स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथाएं महिलाओं की जिम्मेदारियों और अधिकारों को किस प्रकार प्रभावित करती हैं.

 

सह-परियोजना अन्वेषक डॉ. तनुश्री कुंडू ने बताया कि इस अध्ययन में मिश्रित शोध पद्धति अपनाई जाएगी, जिसमें घरेलू सर्वेक्षण, व्यक्तिगत साक्षात्कार, समूह चर्चा और प्रमुख स्थानीय सूचनादाताओं के साथ साक्षात्कार शामिल होंगे. दो वर्षों की इस परियोजना के अंतर्गत छह गांवों में घरों की सूची तैयार की जाएगी, जहां लगभग 1800 घरों में से 600 घरों का चयन सर्वेक्षण के लिए किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे समुदाय स्तर पर महिलाओं के वास्तविक जीवन के अनुभवों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी.

 

इस शोध की एक विशेषता यह है कि यह महिलाओं की स्वायत्तता को व्यापक दृष्टिकोण से देखता है. अध्ययन में उन महिलाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा जो पुरुषों के पलायन के बाद व्यवहारिक रूप से घर की मुखिया बन जाती हैं. 

 

शोध यह दर्शाने का प्रयास करेगा कि जहां एक ओर इन महिलाओं को निर्णय लेने की अधिक शक्ति मिलती है, वहीं दूसरी ओर उन्हें बढ़े हुए कार्यभार, तनाव, सामाजिक दबाव, चिंता और अकेलेपन जैसी मानसिक-भावनात्मक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है.

 

सीयूजे के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने दोनों प्राध्यापकों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियां निरंतर बढ़ रही हैं और झारखंड आधारित सामाजिक विज्ञान अनुसंधान राज्य व समाज की बेहतरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. वहीं  डीन शोध एवं विकास प्रो. अरुण कुमार पाढ़ी ने भी इस उपलब्धि पर दोनों को शुभकामनाएं दीं.

 

डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि इस शोध के निष्कर्ष प्रवासन, ग्रामीण विकास, परिवार कल्याण और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी अधिक संवेदनशील और प्रभावी नीतियां बनाने में सहायक होंगे, विशेष रूप से झारखंड जैसे क्षेत्रों में जहां पलायन एक आम सामाजिक-आर्थिक प्रक्रिया है. उल्लेखनीय है कि डॉ. सिंह को पूर्व में भी कई शोध परियोजनाएं मिल चुकी हैं, जिनमें स्वदेशी खाद्य प्रणालियां और खाद्य सुरक्षा: झारखंड के आदिवासी समुदायों का एक अध्ययन प्रमुख है, जिसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में स्वदेशी खाद्य प्रणालियों की भूमिका को समझना है.

 

 

 

 

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