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CUJ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

CUJ के शिक्षा विभाग द्वारा 21 और 22 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. इस संगोष्ठी का विषय है: “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण से शिक्षक और शिक्षक शिक्षा की पुनर्कल्पना: भारतीय ज्ञान परंपराओं से वैश्विक शैक्षिक विमर्श तक.
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Ranchi : CUJ के शिक्षा विभाग द्वारा 21 और 22 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. इस संगोष्ठी का विषय है: “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण से शिक्षक और शिक्षक शिक्षा की पुनर्कल्पना: भारतीय ज्ञान परंपराओं से वैश्विक शैक्षिक विमर्श तक.

 

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार; भारतीय विश्व कार्य परिषद (ICWA), विदेश मंत्रालय, भारत सरकार; तथा मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एशियन स्टडीज़ संस्थान (MAKAIAS), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार का सहयोग प्राप्त है.

 

संगोष्ठी का उद्देश्य देशभर के शिक्षाविदों, शिक्षक-प्रशिक्षकों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और शैक्षिक कार्यकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहाँ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षक शिक्षा में प्रस्तावित सुधारों पर गहन विमर्श किया जा सके. कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपराओं के आलोक में समकालीन शैक्षिक चुनौतियों तथा वैश्विक शैक्षिक विमर्श में उनकी प्रासंगिकता पर विशेष चर्चा की जाएगी.

 

संगोष्ठी का औपचारिक उद्घाटन 21 जनवरी 2026 को केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के माननीय कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास के नेतृत्व में होगा. उद्घाटन सत्र में प्रो. एस. सी. पांडा, पूर्व प्राचार्य, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भुवनेश्वर (एनसीईआरटी) एवं पूर्व परामर्शदाता, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), नई दिल्ली, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे. इसके अतिरिक्त ICWA और MAKAIAS के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल होंगे.

 

दोनों दिनों के दौरान उद्घाटन सत्र, विशेषज्ञों के प्लेनरी व्याख्यान, तकनीकी सत्र तथा संवादात्मक चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा. प्रतिभागियों को शोध-पत्र प्रस्तुत करने, शिक्षक शिक्षा से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श करने तथा शिक्षण नवाचारों और नीति-क्रियान्वयन की रणनीतियों पर चर्चा का अवसर मिलेगा.

 

आयोजकों के अनुसार संगोष्ठी को देशभर से व्यापक प्रतिक्रिया मिली है. अब तक 150 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं तथा 200 से अधिक प्रतिनिधियों के सहभागिता की संभावना है. आयोजकों को उम्मीद है कि यह संगोष्ठी नीतिगत सुझावों और सार्थक शैक्षणिक निष्कर्षों के साथ संपन्न होगी, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप विकसित भारत@2047 की परिकल्पना को सशक्त बनाएगी.

 

 

 

 

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