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न्यायिक अधिकारियों का घेराव : SC के तेवर तल्ख, मुख्य सचिव से पूछा, आप फोन क्यों नहीं उठाते, जांच NIA के हवाले

पश्चिम बंगाल के मालदा में एक अप्रैल को सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले में आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की टीएमसी सरकार को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट के तेवर आज तल्ख थे.
 
  • पुलिस को निर्देश,केस डायरी और जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड एनआईए के हवाले कर दें
  • मुख्य सचिव को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से माफी मांगनी चाहिए
  • यह प्रशासन और पुलिस की विफलता है, जिसकी वजह से न्यायिक अधिकारी खतरे पड़े
  • CJI सूर्यकांत ने मुख्य सचिव से कहा, आप हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के फैसलों को भी गंभीरता से नहीं लेते.

New Delhi :   पश्चिम बंगाल के मालदा में एक अप्रैल को सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले में आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की टीएमसी सरकार को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट के तेवर आज तल्ख थे.

 

सुनवाई के क्रम में SC ने सीधे पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से पूछा. आप फोन क्यों नहीं उठाते? मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए थे,सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी NIA ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि इस घटनाक्रम में अब तक 11 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं.

 

 

NIA  के अनुसार तीन मुख्य एफआईआर न्यायिक अधिकारियों को धमकी देने और घेराव करने के मामले में की गयी है. एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी. राजू ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी कि एक महिला जज को कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से रोक दिया गया था.

 

इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या यह वही महिला जज थीं, जो वीडियो में रोती गुई नजर आ रही थी. एनआईए ने कोर्ट को बताया कि एक एफआईआर महिला अधिकारी को प्रवेश करने से रोकने, दूसरी घेराव और तीसरी स्थानीय पुलिस की लापरवाही को लेकर दर्ज की गयी है.

 

एनआईए ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में नाकेबंदी किये जाने को लेकर 9 अन्य एफआईआर भी दर्ज कराई गयी हैं. 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.कोर्ट को यह भी बताया गया कि अब तक 309 संदिग्धों की पहचान हो चुकी है. 432 लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण की मांग पुलिस से की गयी है.

 

 एनआईए ने कोर्ट को बताया कि अभी स्थानीय पुलिस जांच कर रही है. इसके बाद एनआईए ने सभी मामलों की जांच अपने हाथ में लेने की अनुमति कोर्ट से मांगी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आदेश पारित किया और एनआईए को सभी 12 मामलों की जांच सौंप दी.

 

कोर्ट ने बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि वह केस डायरी और जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड तुरंत एनआईए के हवाले कर दें.  कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जिन आरोपियों को अब तक गिरफ्तार किया गया है, उनसे एनआईए पूछताछ करेगी.

 

अहम बात यह रही कि सुनवाई के क्रम मे पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया. बताया कि दो आरोपियों शाहजहां कादरी और मफतुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया है. इस पर CJI सूर्यकांत ने मुख्य सचिव से कहा, आप हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के फैसलों को भी गंभीरता से नहीं लेते.

 

इस मुख्य सचिव ने अपनी बात रखते हुए सफाई दी कि वो दिल्ली में बैठक में थे. उन्हें कोई कॉल नहीं मिला. इस पर जस्टिस बागची ने तंज कसते हुए कहा, आप इतने ऊंचे नहीं हो सकते कि मुख्य न्यायाधीश आप तक पहुंच ही न पाये. कृपया जमीन पर रहिए.

 

जस्टिस बागची ने कहा कि यदि आप फोन पर उपलब्ध होते तो स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था. इस क्रम में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुख्य सचिव को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से माफी मांगनी चाहिए. कहा कि यह प्रशासन और पुलिस की विफलता है, जिसकी वजह से न्यायिक अधिकारी खतरे पड़े

 

 

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