International News : नेपाल में आयी तबाही ने पूरे विश्व का ध्यान खींचा है. बाढ़ ने अकल्पनीय तबाही मचाई है. इसका कारण तिब्बत में ग्लेशियर का फटना है. खबरों के अनुसार बाढ़ की चपेट में आकर अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों लोग लापता हैं. इनमें पर्यटक भी शामिल हैं, घर, पुल से सहित भारी संख्या में इमारतें जमीनदोज हो गयी हैं.
Neighbours. Friends. First Responders. 🇮🇳🇳🇵
— Indian Air Force (@IAF_MCC) August 26, 2026
In response to the devastating flash floods in Nepal, the #IAF has swiftly deployed a C-130J aircraft carrying 10 tonnes of essential relief materials and medical supplies.
Additional air effort by C-17 and C-130 aircraft will… pic.twitter.com/pB8ZcRF1Id
नेपाल मलबों के ढेर में बदल गया है. मुश्किल की इस घड़ी में भारत ने नेपाल को मदद भेजी है. भारतीय वायुसेना के भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C-130J विमान 10 टन जरुरी राहतसामग्री और दवाइयां लेकर नेपाल में उतर गया है. C-130J , C-17 भी राहत सामग्री लेकर पहुंच गये हैं. नेपाल के पीएम बालेन शाह में त्रासदी के समय में मदद के लिए भारत का आभार प्रकट किया है.
लेकिन नेपाल अभी भी बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि नेपाल की 47 ग्लेशियर झीलें टाइम बम में तब्दील हो चुकी हैं. सैलाब का खतरा बरकरार है.इन झीलों के फटने से अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे आ सकता है. इससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF )का खतरा है. नेपाल के पहाड़ी जिलों के गांव, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं इसकी चपेट में आ सकती हैं.
नेपाल की प्रमुख नदियों के आसपास 47 ग्लेशियर झीलें बनी हुई हैं. इन 47 झीलों में से 21 नेपाल में हैं और 25 झीलें तिब्बत में सीमा पार मौजूद हैं. ये खतरनाक ग्लेशियर झीलों के रूप में चिन्हित है.
वैज्ञानिक चेतावनी दे चुके है. ये झीलें अगर फट गयीं तो नेपाल की नदी घाटियों में भारी तबाही मच जायगी है. यह आकलन इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और नेपाल सरकार का है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट में अपनी राय साझा करें.

