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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, बोले-विद्यार्थियों के भविष्य को देखकर लिया फैसला

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा पीएम को भेज दिया है.
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Lagatar Desk :  केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा पीएम को भेज दिया है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक की जिम्मेदारी मैंने पहले दिन ही ले ली थी.

 

 

धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर लिखा लंबा-चौड़ा पोस्ट

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की है.  उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से उनका मन बेहद दुखी है और यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और राष्ट्रहित से जुड़ा हुआ है.

 

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि उन्हें भारत के लोकतंत्र की शक्ति पर अटूट विश्वास है और वे हमेशा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का सम्मान करते रहे हैं. उन्होंने लिखा कि देश की युवाशक्ति ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है और उसे किसी भी भ्रम या भटकाव का शिकार नहीं होने दिया जाएगा.

 

उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर सहित देशभर में बनी परिस्थितियों को देखते हुए यह आवश्यक है कि राष्ट्रविरोधी ताकतें इसका फायदा न उठा सकें. साथ ही, देश के किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे और छात्र अपना समय पढ़ाई व करियर निर्माण में लगा सकें. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया है.

 

धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और अपने साथ काम करने वाले सभी लोगों का भी धन्यवाद किया.

 

उन्होंने अपने इस्तीफे के अंत में कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे भविष्य में भी भगवान श्रीजगन्नाथ के आशीर्वाद से भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हरसंभव योगदान देते रहेंगे. 

 

उल्लेखनीय है कि देश के युवा सड़क पर हैं. वह वो बोलने लगे थे, जो पहले इस तरह नहीं बोला गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के बारे में पोल खोल रहे थे. एक तरह से इस आंदोलन ने लोगों के उस डर को खत्म कर दिया, जिसकी वजह से लोग मोदी या मोदी सरकार की आलोचना नहीं करते थे. भाजपा नेतृत्व को बहुत बाद इसका एहसास हुआ. लेकिन तब तक सरकार का जितना डैमेज होना था, उतना हो चुका था.

 

 

 

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