New Delhi : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर तंज कसते हुए उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में होने का आरोप लगाये जाने को लेकर केंद्रीय मंत्री ने राहुल पर पलटवार किया है.
Rahul Gandhi has lot of entertainment value, says Hardeep Singh Puri; calls LS LoP's 'Epstein' remark "elements of buffoonery"
— ANI Digital (@ani_digital) February 11, 2026
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आज बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरी ने विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि संसद में उनका नाम लेकर बेबुनियाद आरोप लगाये गये हैं. हरदीप सिंह पुरी ने राहुल का नाम लिये बिना कहा कि एक युवा नेता ने संसद में कुछ कहा है. उन्हें बिना आधार के आरोप लगाने की आदत है.
उन्होंने कहा कि कुछ नेता ऐसे हैं जब संसद में आते हैं तो दूसरों की बात सुनने के बजाय बाहर चले जाते हैं. आज भी भाषण देने के बाद वे संसद से चले गये.
हरदीप सिंह पुरी ने एपस्टीन फाइल्स के संदर्भ में कहा कि 26 नवंबर (2025) को संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सेंट्रल हॉल में राहुल गांधी उनके पास पहुंचे और आंख मारते हुए कहा, आपका नाम दिलचस्प जगह पर आया है.
श्री पुरी के अनुसार उन्होंने राहुल से पूछा कि क्या आप सच्चाई जानना चाहेंगे? उसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को पूरे मामले को समझाने के लिए नोट्स भेजे थे, लेकिन फिर भी संसद में उनका नाम एपस्टीन फाइल के संदर्भ में लिया गया.
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि उनकी जेफरी एपस्टीन से मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहते हुए हुई थी. यह 2009 का समय था. तब वह न्यूयॉर्क में भारत के राजदूत थे. उन्होंने कहा, यह सारे तथ्य पब्लिक डोमेन में हैं.
इसके आठ साल बाद मैं मंत्री बना. उन आठ साल के दौरान एपस्टीन के साथ 3-4 मुलाकातों का जिक्र किया गया है हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को भेजे गये नोट्स में जानकारी दी थी कि जब वे संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूत के रूप में रिटायर हुए थे, तब अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट में आमंत्रित किया गया था.
हरदीप सिंह पुरी ने कहा, मैं इंडिपेंडेंट कमीशन का जनरल सेक्रेटरी था. उस समय ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस संस्थान के प्रमुख थे. वह एपस्टीन को जानते थे. उसी समंय उनकी मुलाकातें केवल एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने के नाते हुई थीं और इसका किसी आरोप या विवाद से कोई संबंध नहीं है.
हरदीप सिंह पुरी ने यह भी बताया कि एपस्टीन से जुड़े केवल एक-दो ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था. उनके एक संपर्क ने उन्हें लिंक्डइन के रीड हॉफमैन से मिलवाया था.
श्री पुरी के अनुसार उन्होंने उस ईमेल में लिखा था कि भारत इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों के लिए शानदार अवसर प्रस्तुत करता है. मैंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का भी जिक्र किया था. पुरी ने कहा कि जब उन्होंने यह लिखा, तब महज एक नागरिक था, सरकारी अधिकारी नहीं.पुरी ने कहा कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के तहत हुई थी.
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